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अगर पाकिस्तान इसी तरह करता रहा आतंक का समर्थन तो भारत रोक देगा नदियों का पानी

राजनीति,

ले पंगा न्यूज। देवेन्द्र कुमार। 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए पंजाब के अमृतसर पहुंचे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि अगर पाकिस्तान आतंक को नहीं रोकेगा तो हम उसका पानी रोक देंगे। बता दें कि गडकरी ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि पाक की जमीन पर पनप रहे आतंकियों के खिलाफ अगर पाकिस्तान कोई कार्रवाई नहीं करता है तो हम वहां जाने वाली नदियों का पानी रोक देंगे। नितिन गडकरी केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री हैं। गडकरी ने कहा भारत से तीन नदियों का पानी पाकिस्तान में जाता है। हम उस पानी को रोकना नहीं चाहते हैं। लेकिन भारत और पाक के बीच हुई जल संधि का आधार शांतिपूर्ण संबंध और दोस्ती थे। जो अब पूरी तरह से गायब हो गए हैं। पाकिस्तान जल संधि के करार पर खरा नहीं उतर रहा है। इसलिए अब हम इस संधि का पालन करने के लिए बाध्य नहीं हैं।

नितिन गडकरी ने कहा पाकिस्तान लगातार आतंक का समर्थन करता रहा है। गडकरी ने कहा की अगर अब पाकिस्तान आतंकवाद को नहीं रोकता है। तो हमारे पास केवल एक ही विकल्प होगा और वो यह है कि हमें भारत से पाक जा रहे नदियों के पानी को रोकना पड़ेगा। इसलिए भारत ने आंतरिक रूप से इसका अध्ययन शुरू कर दिया है कि वह पानी हरियाणा, पंजाब और राजस्थान को जाएगा।

जानिए क्या है सिंधु जल समझौता

भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरल लाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल अयूब खान के बीच सिंधू जल समझौता हुआ था। जिसे इंडस वाटर ट्रीटी के नाम से भी जाना जाता है। यह समझौता पाकिस्तान के कराची में 19 सिंतबर 1960 को हुआ था। भारत और पाकिस्तान, सिंधु जल समझौते के तहत सिंधु, रावी, ब्यास, सतलुज, चेनाब और झेलम नदी के पानी का इस्तेमाल करते हैं। सिंधु जल समझौते में तय हुआ था कि भारत रावी, ब्यास और सतुलज नदी के 100 प्रतिशत पानी का इस्तेमाल कर सकता है। इसी तरह झेलम, सिंधु और चेनाब नदियों के अधिकांश पानी को इस्तेमाल करने का अधिकार पाकिस्तान को दिया गया है।

आज स्थिति यह है कि इन सभी 6 नदियों के अधिकतम पानी का इस्तेमाल पाकिस्तान ही कर रहा है। सिंधु जल समझौते के तहत भारत को जो नदियां मिली थी भारत उन नदियों के पानी का 100 प्रतिशत इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। क्योंकि भारत ने बीते 71 वर्षों में अपने हिस्से वाली जो नदियां हैं उनपर पर्याप्त बांध नहीं बनाए। बांधों के अभाव में इन नदियों के पानी को भारत स्टोर नहीं कर सकता। भारत ने 2014 में रावी नदी पर शाहपुर-कंडी में बांध का निर्माण शुरू किया है। इसके अलावा रावि-ब्यास लिंक का निर्माण भी किया जा रहा है। ताकि भारत अपने हिस्से के पानी का ठीक तरह से इस्तेमाल कर सके।

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