अनाथ बच्चों को दिया मां का प्यार, अब दादी मां के नाम से जानती है दुनिया

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ले पंगा न्यूज डेस्क, अशोक योगी। मां शब्द में पूरी दुनिया की ममता समाई हुई है, कहते है कितनी भी कठिनाइयां हो या दुख हो मां अपने बच्चों पर इसका प्रभाव नहीं आने देती है। दुनियाभर में मां को ईश्वर के रूप की उपाधि दी गई है। जिन्हे सभी बच्चे दादी मां के नाम से पुकारते है। आज हमें आपको ऐसी महिला के बारें बता रहे है, जिन्होंने अपनी जिंदगी के 15 साल सड़क किनारे भीख मांगने वाले और कचरा बीनने वाले बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित कर दिया। विमला कुमावत ने हमें बताया कि तब सोचा भी नहीं था कि उनके द्वारा शुरू किये गए इस काम से आज इतने बच्चों का भविष्य उजागर हो जाएगा।

गौरतलब है कि 60 वर्षीय विमला कुमावत ने महेश नगर में 15 साल पहले आरएसएस प्रचारक धन प्रकाशित त्यागी से प्रेरित होकर 26 जनवरी को सड़क किनारे कचरा उठाने वाले 5 बच्चों को पढ़ाने के संकल्प को लेकर प्लास्टिक के तिरपाल के नीचे सेवा भारती बाल विद्यालय की शुरुआत की।

बच्चों को विद्यालय तक लाना था चुनौती

विमला ने बताया की शुरूआती दौर में सड़क पर कचरा उठाने वाले बच्चों को स्कूल तक लाना सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण का काम था। विमला वाल्मीकि बस्ती में रहने वाले अनाथ गरीब और कचरे उठाने वाले बच्चों के घर जाकर प्रतिदिन लेकर आती लेकिन कई बच्चों के माता पिता उन्हें निकलने ही नहीं देते थे, लेकिन विमला ने हार नहीं मानी और 45 वर्ष की उम्र में 5 बच्चों को पढ़ाने का और अपने साथ सेवा भारती में रखने का फैसला किया और आज विमला के पास 35 बच्चे है जिनमें 8 बच्चें अनाथ है, 2 बच्चियों की शादी हो चुकी है तो कुछ बच्चे 10 साल की उम्र से भी कम है।
उन्होंने ने बताया है कि सेवा भारती में 310 बच्चों को 10वीं कक्षा तक शिक्षा दी है इसके अलावा सेवा भारती में विमला 35 बच्चों को पाल रही है। जिनमें 1 बच्ची नर्सिंग कॉलेज , 2 महारानी कॉलेज, 1 ज्योतिबा फुले, 1 अम्बेडकर कॉलेज, 7 बच्चे गांधीनगर स्कूल के साथ अन्य बच्चे केडीएम स्कूल में पढ़ रहे है। विमला ने यहां की 2 बच्चियों की शादी में भी कपडे, जेवरात और नकद राशि के जरिए भी सहयोग किया है।

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#अनाथ बच्चों #विमला कुमावत सेवा भारती कार्यक्रम

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