अनुच्छेद 370 के हटने के बाद अब घाटी की बदल रही रही तस्वीर…!

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ले पंगा न्यूज डेस्क, चंदना पुरोहित। अब तक कश्मीर की घाटियाँ हिंसा, पत्थरबाजी, कट्टर पंथ के लिए जानी जाती थी। किसी भी बात का जवाब की शांति नहीं थी। कश्मीर का अपना अलग कानून होने के बावजूद घाटी आज़ादी का नारा बुलंद किए हुए थी। अनुच्छेद 370 के हटाने के बाद यह कहना मुश्किल था की घाटी इसकी प्रतिक्रिया किस तरह देगी। सरकार ने घाटी में शांति बनाए रखने के लिए पूरी एहतियात रखी थी। घाटी में धारा 144 लागु थी। अब धीरे धीरे पाबंदियों में कमी लाई जा रही है।

अनुच्छेद 370 के हटाने के बाद देखा जा रहा है की घाटी का नजारा बहुत बदल गया है। अब बंदूक की जगह पोस्टर ने ले ली है। आतंकीयों, राष्ट्रविरोधियों ने अपने संदेश पर्चो से पहुँचाना शुरू कर दिया है। आतंकवादी अब पोस्टर पर अपना संदेश लिखकर लोगों को धमका रहे हैं वही राष्ट्रवादी तत्व पोस्टरों से कश्मीर के होने वाले फायदे गिना रहे हैं। आतंकवादी, अलगाववादी,जिहादी तत्व सख्ते में है। उनके पुराने पैतरे काम नहीं आ रहे हैं जिसकी उन्हें आदत है। हिंसा का रास्ता अपनाना इन तत्वों के लिए आसान नहीं रहा है उन्हें भी अब पोस्टर का सहारा लेना पड रहा है। यह नजारा आतंकवाद के गढ़ पुलवामा, शोपियां, कुलगाम के इलाकों में हो रहा है। उर्दू भाषा में लिखे इन पोस्टरों को हर जगह लगाया जा रहा है और लोग इन्हे पढ़ रहे हैं। घाटी में यह पोस्टर चर्चा का विषय बन गए हैं।

घाटी के आवाम का मिजाज बादलता हुआ नजर आता है। घाटी की जनता भी सरकार के साथ दिखाई देने लगी है। उन्हें भी लगने लगा है की अलगववादी और आतंकवाद ने हमें दिया ही क्या है? सरकार का भी साथ दे कर देख लेते हैं। जीहादी तत्वों ने आज तक कश्मीरियों को बंदुक और मौत के अलावा कुछ नहीं दिया। इन राष्ट्र विरोधी लोगो का लोगो के मन में भय है। इनके विरोध में वह खुल के तो नहीं आ सकते और नहीं खुल के सरकार के साथ हो सकते हैं। इसलिए अब वह रात के अंधेरों में निकल कर अनुच्छेद 370 हटाने के फायदे बताने वाले पोस्टर चिपकाने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है की अब लोग इन पर्चों को पढ़ने लगे हैं और उस बारे में सोचने लगे हैं। वह अब इन पर्चों को फाड़ते नहीं है। उन लोगो का कहना है की आज तक हमें कब्रिस्तान ही नसीब हुआ है।

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