rahul gandhi

अन्दर से सपा-बसपा भी राहुल का कर रही है समर्थन

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज डेस्क, अशोक योगी। इन दिनों देश की तमाम पार्टी अपना पूरा दम लगाकर धुआंधार चुनाव प्रचार में लगी हुई है। ऐसे में भाजपा से मुकाबला कर रही कांग्रेस पार्टी अमेठी से पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को बड़ी जीत कराने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। वही पार्टी के सभी बडे नेता अमेठी का दौरा कर रहे है। क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अमेठी में राहुल के विरुद्ध स्मृति ईरानी को उतारा। क्षेत्र में नई उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने तत्कालीन कांग्रेस उपाध्यक्ष को अच्छी चुनौती दी और 2009 में उनके जीत के 3.7 लाख के अंतर को घटाकर केवल एक लाख मतों तक कर दिया। इससे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की आंख खुल गई। जिसके बाद वे जीत के अंतर को बरकरार रखने के लिए तेजी से काम में जुट गए। इसके बाद से सूक्ष्म स्तरीय योजना के तहत ‘पूर्वा’ यानी गांवस्तर तक टीमों को भेजी गई और ऑनलाइन ऐप ”शक्ति’ के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है। ‘शक्ति’ एक ऐसा ऑनलाइन मंच है जिसके जरिए देशभर में बूथ स्तरीय समूहों के प्रदर्शन को ट्रैक किया जाता है। अमेठी में पार्टी समन्वयकों ने एक विशेष प्रयास भी किया है, जहां राहुल को पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश किया गया है। पार्टी की प्रणाली को दुरुस्त करने के अलावा, कार्यकर्ताओं से जीत का अंतर पांच लाख वोट से भी ज्यादा सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। सूत्रों के मुताबिक यह कि तथाकथित प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी के प्रभावशाली नेताओं की भी इस कार्य में मदद ली जा रही है।

पार्टी कार्यकर्ताओं से एकजुट हो कर कार्य करने का किया आग्रह

आम चुनाव में कांग्रेस से सपा-बसपा ने गठबंधन के लिए किनारा कर लिया है, लेकिन अखिलेश यादव की पार्टी सपा का 2017 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन था और दोनों पार्टियों में जुड़ाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी की सपा व बसपा के स्थानीय नेताओं से राहुल को समर्थन देने के लिए कई बार बातचीत हुई है। उन्होनें साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं से लक्ष्य के लिए एकजुट होकर काम करने का आग्रह भी किया गया था।
गौरतलब है कि राहुल ने 2009 में बसपा के आशीष शुक्ला को 3.7 लाख मतों से हराया था। इसकी तुलना में 2014 में ईरानी को तीन लाख मत मिले थे। राहुल को 4.08 लाख मत मिले थे। सूत्रों का कहना है कि यह अंतर ओर ज्यादा कम हो सकता है, जो कांग्रेस पार्टी में चिंता का विषय बना हुआ है। 2014 में हार के बावजूद अपने प्रदर्शन से उत्साहित ईरानी तबसे लगातार अमेठी के दौरे कर रही हैं और इस प्रतिष्ठित सीट पर कब्जा जमाने के लिए काफी मेहनत कर रही हैं जहां कई लोग उन्हें अभी भी ‘बाहरी’ की तरह ही मानते हैं।

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