अब कश्मीर में भी लहराएगा तिरंगा…!

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ले पंगा न्यूज डेस्क, चंदना पुरोहित: अनुच्छेद 370 जब तक कश्मीर में प्रभावी था तब तक कश्मीर में राज्य का झंडा केंद्र के झंडे के साथ साथ प्रभावी था। अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद राज्य का झंडा भी निष्प्रभावी हो गया है। कश्मीर का झंडा लाल रंग का था। उस पर एक हल का निशान था और तीन लकीरें थी। इन तीन लकीरें का मतलब जम्मू, कश्मीर और लद्दाख से है। 1952 में जवाहरलाल नेहरू और शेख अब्दुल्ला के बीच केंद्र और राज्य के बीच शक्तियों को लेकर करार हुआ था तब तिरंगे को केंद्र का तथा राज्य के झंडे को राज्य का झंडा माना गया। यह झंडा राजनीतिक आंदोलन का प्रतिक माना जाता था।

यह 1947 के पहले के शोषण का यह प्रतिक था। अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के साथ ही यह झंडे हटा दिए जाने चाहिए थे परन्तु कश्मीर के माहौल को ध्यान में रखते हुए यह झंडे तुरंत हटाए नहीं गए थे। अब राज्य के झंडे को सरकारी दाफ्तरों से हटाए जाने की तैयारी की जा रही है।

बताया जाता है की, डोगरा सरकार ने 1931 में श्रीनगर की सेंट्रल जेल के पास एक जुलुस पर फायरिंग के आदेश दिए थे। उस फ़ायरींग के दौरान 21 लोगो की जान गइ थी। उसी भीड़ में से किसी ने एक मृतक की खून से सनी कमीज को उतारकर और भीड़ ने उसे कश्मीर के झंडे की तौर पर फहराया। प्रथम तो इसे जम्मू कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस पार्टी ने पार्टी का झंडा बनाया था। इसके बाद 1952 में इसे जम्मू कश्मीर का आधिकारिक झंडा बना दिया गया।

नेहरू और शेख अब्दुल्ला में हुए करार की धारा 4 में यह सहमति हुई की राज्य का झंडा स्वतंत्रता संग्राम का प्रतिक है इसीलिए उसे रखने की जरुरत है। राज्य का झंडा केंद्र के झंडे का प्रतिरोधी नहीं होगा। राज्य में केंद्र का झंडा भी मान्य होगा और राज्य का झंडा भी होगा।

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