अमाप पैसा होते हुए भी सऊदी अरब आत्मरक्षा करने में सक्षम नहीं है क्यों ?

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ले पंगा न्यूज डेस्क, चंदना पुरोहित। सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको पर हमला हैरत में डालने वाली घटना हैं। सऊदी अरब एक संपन्न देश है फिर भी अपनी रक्षा करने में सक्षम नहीं है। अरामको पर यह दूसरा हमला है। अमेरिका का दावा है की यह हमला ईरान ने करवाया है। वही ईरान ने हमले की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है। हमले की जिम्मेदारी हुति संगठन ने ली है जिसको ईरान समर्थन प्राप्त है। 17 अगस्त को अरामको पर 20 ड्रोन से हमला किया गया था। जिस सऊदी अरब के पास अनाप पैसा है उस पर हमले होना हजम नहीं होता। इतना पैसा होने के बावजूद सऊदी अपनी आत्मरक्षा के लिए तैयार नहीं है। सऊदी अरब का सैन्य बजट भी अधिक है। फिर भी वह विद्रोहियों से निपटने के लिए नाकामयाब है।

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सऊदी अमेरिका से हथियार आयात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है, फिर भी अपनी रक्षा करने में नाकामियाब होने की वजह हो सकती है की सऊदी अपने बजट को से खर्च नहीं कर पा रहा है। ईरान का सैन्य बजट कम होने के बावजूद उसकी सेना मजबूत है। समुद्र में भी ईरान मजबूत है। सऊदी की सेना में ना तो कोई तालमेल है नहीं ताकत।

सऊदी के पास 230000 सैनिक हैं परन्तु वह ईरान के मुकाबले आधे ही हैं। सऊदी के पास 25000 रिज़र्व सैनिक हैं वही ईरान के पास 400000 रिज़र्व सैनिक हैं। अगर हम सऊदी और ईरान के सैन्य बजट की तुलना करे तो सऊदी का सैन्य बजट 69 अरब डॉलर है वही ईरान का सैन्य बजट 14 अरब डॉलर है। भारी भरकम पैसा होने के बावजूद सऊदी की अपनी कोई आर्म्स इंडस्ट्री नहीं है। वही ईरान रेगिस्तान में भी अपनी आधुनिक मिसाइल बना रहा है।

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