आपराधिक धवि वाले सांसदों को मंत्रिमंडल में शामिल करेंगे मोदी?

राजनीति,

ले पंगा। देवेन्द्र कुमार। चुनाव आयोग व न्यायपालिका इस बात का प्रयास करती है की देश की राजनीति में आपराधिक धवि व भ्रष्टाचारी नेता शामिल नहीं हों। लेकिन आयोग व पालिका के ये प्रयास राजनीतिक दलों की उदासीनता के कारण असफल हो जाते हैं। इस बात का सबसे ताजा उदाहरण 17वीं लोकसभा का चुनाव है। इस बार के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को कुल 303 तो राजग को कुल 353 सांसद मिले हैं। राजग के जो 353 सांसद इस चुनाव में जीत हालिस कर संसद पहुंचे हैं उनमें से अधिकतर सांसद आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हैं।

अब इस स्थिति में यह सवाल उठना जाहिर है कि क्या पीएम मोदी अपनी सरकार में इस तरह के आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सांसदों को जगह देंगे जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं? पीएम मोदी साफ-सुथरी छवि वाली सरकार देने की प्रतिबद्धता को बार-बार दोहराते हैं, तो अब देखना यह है कि प्रधानमंत्री मोदी मंत्रिपरिषद को अंतिम रूप देते समय उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ के पांच साल पहले की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए दागी छवि वाले नेताओं को सरकार में जगह नहीं देंगे।

 

रिपोर्ट के अनुसार 233 सांसद आपराधिक छवि वाले हैं

 

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफार्म्स की रिपोर्ट के अनुसार इस बार की 17वीं लोकसभा के चुनाव में कुल 233 ऐसे प्रत्याशी विजयी हुए हैं जिन्होंने आपराधिक मामलों की घोषणा की है। बहुमत हासिल करने वाली भाजपा की बात करें अकेले भाजपा के ही 116 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं। इनमें से 87 सांसदों के खिलाफ गंभीर अपराध के मामले दर्ज हैं। रिपोर्ट के अनुसार भाजपा के पांच सांसदों पर हत्या, एक सांसद पर हत्या के प्रयास, चार सांसदों पर अपहरण और एक सांसद के खिलाफ महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज हैं।

रिपोर्ट के अनुसार राजग के घटक दल जद यू के छह और शिवसेना के पांच विजयी प्रत्याशियों ने भी अपने खिलाफ गंभीर अपराध के मामलों की घोषणा नामांकन पत्र में की थी।

सत्तारूढ़ गठबंधन के सदस्यों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों की इस सूची को देखते हुए केंद्रीय मंत्रिपरिषद में ऐसी पृष्ठभूमि वाले किसी भी सांसद या व्यक्ति को शामिल करने से पहले उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ की अगस्त 2014 की व्यवस्था को ध्यान में रखने की आवश्यकता है।

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