आमिर खान हुए 54 के , मना रहे भव्य जन्मदिन

लोकसभा 2019,

बॉलीवुड के सुपरस्टार और मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान आज अपना 54वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं. आमिर का जन्म मुंबई में 14 मार्च 1965 को हुआ था. आमिर एक भारतीय फिल्म अभिनेता, निर्देशक, निर्माता, टेलीविज़न हस्ती, सामाजिक कार्यकर्त्ता, चलचित्र लेखक और मानव प्रेमी है. फिल्म जगत में अपने सफल करियर के बल पर उन्होंने खुद को हिंदी फिल्म जगत का सबसे मशहूर कलाकार बनाया.इस मशहूर हस्ती को उनके फ़िल्मी करियर में कई सारे पुरस्कारों से नवाज़ा गया है, जिसमे चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और सात फिल्मफेयर अवार्ड भी शामिल है. इसके साथ ही भारत सरकार की तरफ से उन्हें 2003 में पद्मश्री और 2010 में उन्हें पद्म भूषण से भी नवाज़ा गया था.आज खान के जन्मदिवस के मौके पर सोशल मीडिया पर उनके चाहने वाले लाखों -करोड़ों फैंस अपने चहेते सितारे को जन्मदिन की ढेरों बधाईयां दे रहे हैं. यह बात तो हम सब बखूबी जानते ही है कि, इंडस्ट्री में आमिर खान का अपना अलग ही रुतबा है. उनकी शख्सियत का हर कोई दीवाना है. आज के दिन आमिर के फैंस जानना चाहते हैं कि वे कैसे अपना जन्मदिन सेलिब्रेट करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, अभिनेता अपने जन्मदिन पर सेलिब्रेशन के साथ-साथ काम भी करेंगे.

खबरों के मुताबिक, आमिर खान अपने बांद्रा स्थित घर में मीडिया के साथ बर्थडे सेलिब्रेट करेंगे. हर साल की तरह इस बार भी आमिर मीडिया के साथ ही अपना 54वां बर्थडे केक काटेंगे. इसके बाद वे नॉर्थ आयरलैंड के लिए निकलेंगे. जहां बेलफेस्ट फिल्म फेस्टिवल हो रहा है. इसके अलावा वे 16 मार्च को ‘नासरीन मुन्नी कबीर’ से अपने काम और आने वाले प्रोजेक्ट्स के बारे में बात करेंगे.

ये था जन्म का नाम

आमिर खान का जन्म ताहिर हुसैन है और जीनत हुसैन के बड़े बेटे के रूप में हुआ था. उनके पिता ताहिर हुसैन एक फिल्म निर्माता भी रहे है. खान अपने चार भाई-बहनों में सबसे बड़े है, उनके एक भाई है, फैसल खान और दो बहने, फरहत और निखत खान हैं. उनका भतीजा, इमरान खान एक आधुनिक हिंदी फिल्म अभिनेता है

पिता के आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी  बचपन में

आमिर खान बचपन में ही दो भूमिका में परदे पर आये थे. उस वक्त उनकी आयु महज़ 8 वर्ष की थी,खान ने बाद में प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के लिए जे.बी. पेटिट स्कूल जाना शुरू किया और बाद में 8वी कक्षा तक बांद्रा की सेंट एंस स्कूल से उन्होंने शिक्षा ग्रहण की. और महिम की बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल से 9वी और 10वी की शिक्षा ग्रहण की. आमिर को बचपन से ही टेनिस में काफी रूचि थी वो खूब टेनिस खेला करते थे , इसके साथ ही उनके शिक्षको का हमेशा से ही यह कहना था की, खान का ध्यान पढाई में कम और खेलने में ज्यादा है. मुंबई के नरसी मोंजी कॉलेज से उनकी 12 वी की शिक्षा प्राप्त की. खान ने अपने बचपन में आर्थिक परेशानिया होने की वजह से बहुत ‘कठिन’ वक्त भी बिताया है. उस समय उनके पिता को आर्थिक मंदी से होकर गुजरना पड़ रहा था, स्टार ने बताया की उनके पिता ने जिन-जिन से भी उधार ले रखा था उनके तक़रीबन दिन में 20-30 फ़ोन आते रहते थे. और खान को हमेशा से ही यह डर लगा रहता था की कही फीस ना देने की वजह से उन्हें स्कूल से निकाला न जाये.

इस फिल्म के लिए मिला था बेस्ट फिल्म फेयर पुरुस्कार

आमिर खान सबसे पहले एक बाल कलाकार के रूप में फिल्म जगत में आये. और बाद में उनका पहला फिल्म अभिनय 1984 की होली फिल्म शुरू हुआ था. उन्हें अपने भाई मंसूर खान के साथ फिल्म क़यामत से क़यामत तक (1988) के लिए अपनी पहली कमर्शियल सफलता मिली और इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ट मेल नवोदित पुरस्कार भी दिया गया. उस समय उनकी एक और थ्रिलर फिल्म राख (1989) ने कई पुरस्कार अपने नाम किये. 1990 के दौर में एक से बढ़कर एक सफल फिल्मे देकर उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपना नाम स्वर्णक्षरो से लिख दिया था. उस समय उनकी सबसे सफल फिल्मो में रोमांटिक ड्रामा ‘दिल’ , रोमांटिक राजा हिन्दुस्तानी , इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर की तरफ से बेस्ट अभिनेता का पुरस्कार भी मिला, और इसके आगे उनकी ड्रामा फिल्म सरफरोश भी शामिल है. हिंदी फिल्मो के अलावा उन्होंने एक कैनेडियन-भारतीय फिल्म अर्थ में भी अभिनय किया है.

2001 में, आमिर खान / Aamir Khan ने एक प्रोडक्शन कंपनी की स्थापना की. और अपने प्रोडक्शन में पहली फिल्म ‘लगान’ रिलीज़ की. यह फिल्म आलोचकों और कमर्शियल लोगो की नज़र से सफल रही और साथ ही इसे सर्वश्रेष्ट विदेशी भाषा फिल्म (Best Foreign Language Film) के लिए 74 वे अकादमी पुरस्कार में भारत की अधिकारिक सूची में चुन लिया गया. इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का अवार्ड भी मिला और ‘लगान’ को साल की सर्वश्रेष्ट फिल्म का दर्जा दिया गया. इसके बाद फिल्म से 4 सालो तक दूर रहने के बाद खान ने प्रेरणादायक भूमिका अदा करना शुरू की और 2005 में केतन मेहता की मंगल पांडे में वे एक सिपाही के रूप में दिखे. और 2006 में उन्होंने दो सुपरहिट फिल्म ‘फना’ और रंग दे बसंती रिलीज़ की. उसी साल में उन्होंने अपने करियर की शुरुवात एक निर्माता के रूप में भी की और 2007 में तारे जमीन पर का निर्माण किया. जिसे दर्शको की अच्छी प्रतिक्रिया मिली. और इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ट निर्देशक (Best Director) का भी पुरस्कार मिला. कमर्शियली खान की सबसे सफल फिल्मो में गजनी, 3-इडियट्स , धुम-3 और पीके शामिल है, जिनके रिलीज़ होते ही बॉलीवुड के कई रिकार्ड्स धराशाही हो गये थे. ठग्स की असफलता के बाद आमिर खान ने फैंस के निराश होने पर माफी भी मांगी थी. ठग्स के बाद उनकी शॉर्ट मूवी ‘रूबरू’ रोशनी रिलीज हुई थी. सामाजिक मुद्दे पर बनी इस मूवी को लोगों ने काफी पसंद किया. इसका निर्माण किरण राव और आमिर खान के प्रोडक्शन ने किया और निर्देशन स्वाति चक्रवर्ती ने किया.

रीना दत्ता ने निभायी कैरियर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका

खान के लव और वैवाहिक जीवन की बात करे तो की आमिर खान का विवाह रीना दत्ता से हुआ, जिसने क़यामत से क़यामत तक में छोटी सी भूमिका निभाई थी. उनका विवाह 18 अप्रैल 1986 को हुआ था. उनसे उन्हें दो बच्चे भी है जिनके नाम बेटा जुनैद और एक बेटी इरा. रीना ने आमिर के करियर को सफल बनाने में उनकी बहुत सहायता की थी. लेकिन फिर भी दिसम्बर 2002 में खान ने उन्हें तलाक दे दिया था, और इस तरह 15 साल की शादी में टूट गयी. रीना को ही उनके दोनों बेटे की देखभाल करने के लिए दिया गया था. 28 दिसम्बर 2005 को, खान का दूसरा विवाह किरन राव से हुआ, जो लगान फिल्म बनाते समय आशुतोष गोवारिकर की सह-निर्देशक थी. 5 दिसम्बर 2011 को उन्हें एक बेटा, जिसका नाम हे आजाद राव खान.

आज देश का बच्चा-बच्चा आमिर खान को चाहता है. उनके Follower हमें भारत में ही नही बल्कि विदेशो में भी मिलते है. वे हमेशा से ही सामाजिक गतिविधियों में सक्रीय रूप से हिस्सा लेते रहे है. एक सफल कलाकार होने के साथ ही खान एक मानव प्रेमी भी है, बाद में उन्होंने समाज में हो रही गतिविधियों पर बोलना भी शुरू किया. वे कई राजनितिक गतिविधियों में हिस्सा लेने लगे और समाज सेवा करने लगे. समाज में हो रही समस्याओ को जानने के लिए उन्होंने एक टेलीविज़न शो ‘सत्यमेव जयते’ का निर्माण भी किया, जिसमे उन्होंने भारत में तेज़ी से बढ़ रही समस्याओ को दिखाया और साथ ही उसे रोकने की भी कोशिश की.

गौरतलब है कि आमिर खान हमेशा से ही लोगो को यह सलाह देते आये है की, “आप तब महान नही बनते जब आप बड़ी-बड़ी बाते करने लगते हो, जबकि आप महान तब बनते हो जब आप छोटी-छोटी बातो को समझने लगते हो.”

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