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आर्टिकल 35 ए पर सुप्रीम कोर्ट में इस हफ्ते सुनवाई होने कि उम्मीद है मोदी सरकार अध्यादेश के जरिए इस कानून में बदलाव कर सकती है।

लोकसभा 2019,

इसके तहत जम्मू-कश्मीर सरकार राज्य के नागरिकों को पूर्ण नागरिकता प्रदान करती है सरकार इस कानून को अध्यादेश के जरिए समाप्त कर सकती है आर्टिकल 35 ए के तहत जम्मू और कश्मीर के बाहर का कोई भी व्यक्ति यहां किसी प्रकार की संपत्ति नहीं खरीद सकता है। साथ ही यहां कि महिला से शादी के बाद उसकी संपत्ति पर अपना हक नहीं जमा सकता है। ये राज्य के लोगों को विशेष दर्जा देती है।

शनिवार को सरकार के अधिकारियों के बताया कि सरकार आर्टिकल 35 ए विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक अभी मामला न्यायलय में विचाराधीन है, ऐसे में सरकार इस पर कुछ निर्णय नहीं कर सकती है। उन्होंने इस बात से भी इंकार कर दिया कि सरकार इस कानून पर अध्यादेश लाएगी। लेकिन इस बात पर बल दिया कि मामला कोर्ट में होने से इसका समाधन निकल जाएगा। सरकार इस बारे में सलाह कर रही है। 2014 में एक गैर सरकारी संस्था (NGO) वी द पीपुल ने सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल (PIL) डाली थी। इसके साथ ही इससे संबंधित 20 याचिकाएं न्यायलय में अभी लंबित है। जबकि करीब 14 बार यह मामला लिस्ट किया जा चुका है लैकिन अभी तक इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई है।

संविधान में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की सलाह पर इस बात का जिक्र है कि आर्टिकल 35 ए के तहत कोई भी जम्मू-कश्मीर की महिला राज्य के बाहर के व्यक्ति से विवाह कर सकती है। इस प्रस्ताव को चैलेंज किया गया है कि यह कानून राष्ट्रपति आदेश से प्रभावी हुआ है।
जबकि कानून बनाने का अधिकार सिर्फ संसद के पास है। विरोधियों ने भी सवाल करते हुए कहा था कि कानून महिला विरोधी है, भेदभावपूर्ण है साथ ही संविधान में दी गई समानता, एकता की भावना को मजबूत बनाने से रोकता है।

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