इस कारण अब कश्मीर में रोज नहीं मिला जा सकता नजरबंद नेताओं से

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ले पंगा न्यूज डेस्क, चंदना पुरोहित। 5 अगस्त को कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद कश्मीर में कुछ नेताओं को पूरक जेल में बदले गए संटूर होटल में बंद किया गया। अब तक इस कैद को लेकर भी बड़ा सियासी घमासान मचा हुआ था। विपक्षी पार्टियां सत्तारूढ़ पार्टी को घेर रही थी। पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित राज्यों में पुनर्गठित करने के फैसले के मद्देनजर उपजी स्थिति में राज्य प्रशासन ने एहतियात के तौर पर घाटी में राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं व कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था।

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अब इन नेताओं को कोई रोजाना नहीं मिल पाएगा। नजरबन्द नेताओं की बंदी के नियम बदल दिया गए है। अब उनसे रोजाना नहीं मिला जा सकता है। अब इन राजनेताओं से मिलने का समय तय कर दिया गया है। उनसे अब सिर्फ बुधवार या शनिवार को मिलाने का समय लिया जा सकता है। बुधवार और शनिवार को भी सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक मिला जा सकता है। राजनेताओं से मिलते वक़्त उन के लिए किसी भी प्रकार का तोहफ़ा ले जाना मना है। इससे पहले इन नेताओं से कोई भी कभी भी मिल सकता था।

इस समय 33 राजनीतिक नेता संटूर में नजरबंद हैं। बताया जा रहा है कि संटूर पूरक जेल में इस समय पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन व उनके सहयोगी अब्बास वानी, पीडीएफ के चेयरमैन हकीम मोहम्मद यासीन, नेशनल कांफ्रेंस के मुबारक गुल, अली मोहम्मद सागर व सलमान सागर, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नईम अख्तर, वहीदुर्रहमान पारा व सरताज मदनी नजरबंद हैं। सारा दिन मिलाने वालों की भीड़ से हो ने वाली परेशानी और सुरक्षा दृष्टि से यह फैसला लिया गया है।

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#अनुच्छेद 370 #कश्मीर #नजरबंद

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