इस कारण मीसा बंदियों को नहीं दी जाएगी पेंशन और…!

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ले पंगा न्यूज डेस्क, चंदना पुरोहित। कांग्रेस और सरकार के बीच निकाय चुनाव को लेकर मतभेद चल रहे थे। निकाय अध्यक्ष को दो तरीके से चुना जा सकता है या तो सीधे जनता द्वारा या तो फिर चुने हुए पार्षदों के द्वारा इस तरह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से निकाय अध्यक्ष को चुना जा सकता है। कुछ महीनो पहले राज्य सरकार ने निकाय अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष यानि सीधे जनता के द्वारा करवाने का फैसला किया था लेकिन अब सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया है। अब निकाय अध्यक्ष चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होंगे यानि अध्यक्ष का चुनाव चुने हुए पार्षद मिलकर करेंगे। राज्य कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

निकाय चुनाव के साथ ही राज्य सरकार ने और भी 2 फैसलों में बदलाव किया है। राज्य सरकार द्वारा मीसा बंदियों को कुछ पेंशन दी जा रही थी। अब मीसा बंदियों को पेंशन और अन्य सुविधाएँ ना देने का फैसला लिया गया है। मीसा के 4000 ऐसे बंदी हैं जिन्हें 20000 रूपए का मासिक पेंशन और 4000 रूपए का मेडिकल और अन्य सुविधाएँ मिल रही थी इन बंदियों को बतौर स्वतत्रंता सेनानी यह राशि दी जा रही थी। बीजेपी सरकार ने मीसा बंदियों को पेंशन देने का प्रावधान किया था और अब कांग्रेस सरकार ने इसे बंद करवा दिया है।

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मौजूदा सरकार ने टीएसपी जिल्हो के लिए भी बड़ा महत्वपूर्ण फैसला किया है। सरकार ने फैसला किया है की अगर गैर टीएसपी लड़की टीएसपी क्षेत्र के लडके से शादी करती है तो उसे भी टीएसपी में आरक्षण मिलेगा। टीएसपी में बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सिरोही, पाली, राजसमंद और चित्तौड़गढ़ यह क्षेत्र आते हैं। इस फैसले से सरकार ने गैर टीएसपी लड़कियों को लुभाने की कोशिश की है। टीएसपी में राज्य सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी राजकीय सेवा के पद पर सीधी भर्ती से भरी जानेवाली रिक्तियों की 45 फीसदी रिक्तियां टीएसपी के एसटी, 5 फीसदी रिक्तियां एससी और 50 फीसदी रिक्तियां अनारक्षित पद मानते हुए टीएसपी के अभ्यर्थियों की योग्यता के आधार पर वरीयता क्रम के नियमानुसार चयन किया जाता है।

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