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परिवार की लाज बचा पाएंगें राजकंवर?

लोकसभा 2019,

लेपंगा न्यूज डेस्क, अशोक योगी। राजस्थान में लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा होने के बाद राजनैतिक पार्टी ने उम्मीदावार की भी घोषणा कर दी है। राजस्थान में मतदान दो चरणों में 29 अप्रैल और छह मई को होगा। लोकसभा चुनाव को लेकर देश की दोनों सबसे बड़ी पार्टियां कार्यकर्ताओं को जोड़-तोड में लगी हुए है। इस चुनाव में राजस्थान के मौजूदा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया से उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। क्योंकि दोनों ही अपने-अपने दलों के प्रमुख नेता होने की वजह से इन दोनों पर ही चुनाव में संगठन के लिए बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद की जा रही है।

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सूबे के राजनीतिकारों के मुताबिक इन दोनों ही नेताओं को संगठन के बजाय अपने-अपने उत्तराधिकारियों यानी अपने बेटों के राजनैतिक भविष्य की फ़िक्र ज्यादा सता रही है। वही जसंवत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह जसोल कांग्रेस के टिकट पर सीट बचाने उतरेगें।

दुष्यंत सिंह झालावाड़-बारां सीट से भाजपा के टिकट पर लड़ेंगे चुनाव

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के बेटे दुष्यंत सिंह झालावाड़-बारां सीट से भाजपा के टिकट पर पिछले तीन बार से सांसद चुने आ रहे है। इससे पहले वसुंधरा राजे लगातार तीन बार इस सीट से सांसद चुनी जा चुकी है। भाजपा एक चुनाव में एक ही परिवार से दो लोगों को चुनाव लड़वाने से बचती आई है, ऐसे में राजे परिवार के लिए यह चुनाव दोहरा नुकसान वाला साबित हो सकता है। हालांकि जानकारों का यह मानना है कि बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के मैदान दुष्यंत सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं बताया जा रहा है कि इन लोकसभा चुनावों में अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत भी कांग्रेस के टिकट पर अपना सियासी सफ़र शुरु कर सकते हैं।

वैभव गहलोत कांग्रेस के टिकट से चुनावी सियासत में रखा कदम

सूत्रों के मुताबिक वैभव गहलोत प्रदेश कांग्रेस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाले हुए हैं, लेकिन अगर वे लोकसभा चुनाव में चुनावी सियासत में पहला कदम रखने जा रहे है। पिता अशोक गहलोत का मुख्यमंत्री होना वैभव गहलोत के लिए लिए जितना फायदेमंद दिखता है, उतना ही परेशान करने वाला होगा। पिछले दिनों राजस्थान में अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच खींचतान देखी गई थी। राजनैतिक विश्लेषकों के अनुसार विधानसभा चुनावों के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए अशोक गहलोत के अड़ने के पीछे एक प्रमुख कारण यह भी था कि वे इस कार्यकाल में वैभव गहलोत को राजनैतिक तौर पर स्थापित कर सकें। जानकारों ने बताया है कि यही बात कांग्रेस के युवा प्रदेशाध्यक्ष पायलट को खटकती है क्योंकि कहीं न कहीं वे अशोक गहलोत के बाद वैभव गहलोत को भी अपने प्रतिद्वंदी के तौर पर देखते हैं। कुछ दिनों पहले सचिन पायलट ने बयान दिया था कि इन लोकसभा चुनावों में उनके परिवार का कोई सदस्य खड़ा नहीं होगा। इस बयान के ज़रिए उन्होंने असल में वैभव पर ही निशाना साधा था। विपक्ष कांग्रेस पर जिस परिवारवाद का पुरजोर आरोप लगाता रहा है। वैभव गहलोत के लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी की घोषणा कर दी है।

कांग्रेस ने मानवेंद्र सिंह को बाडमेर दिया टिकट

पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह जसोल के बेटे और पश्चिमी राजस्थान के कद्दावर नेता मानवेंद्र सिंह जसोल कांग्रेस से करीब छह महीने पहले ही भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। 22 सितंबर 2018 को पचपदरा में स्वाभिमान रैली में मानवेंद्र ने कमल का फूल हमारी भूल नारे के साथ भाजपा को अलविदा कह दिया। सूत्रों के मुताबिक मानवेंद्र सिंह आगे के राजनीतिक कदम के बारे में पत्ते खोले दिए है। मानवेंद्र सिंह सिर्फ इस क्षेत्र के नेता नहीं है, वो एक प्रभावशाली राजपूत नेता के रुप में भी जाने जाते है। इसलिए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने नेता को छिटकने की तोहमत अपने माथे नहीं ले सकती जो न सिर्फ वसुंधरा राजे बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की सरेआम मुखालफ़त करके उससे जुड़ा था।

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मानवेन्र्द सिंह को बाडमेर सीट से मौका दिया गया है।  राजस्व मंत्री हरीश चौधरी की दावेदारी और मानवेन्द्रसिंह के टिकट देने के विरोध की वजह से बाड़मेर हॉट सीट बनी थी। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हुए मानवेन्द्रसिंह विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस की ओर से सीएम वसुंधराराजे के सामने झालरापाटन से मैदान में उतारा लेकिन चुनाव हार गए। लोकसभा चुनाव बाड़मेर से लड़ने जा रहे है। सियासी जानकार का कहना है कि ‘जाटों को लगता है कि यह सीट उनके कब्जे में रही है और अगर एक बार मानवेंद्र सिंह स्थापित हो गए तो बाड़मेर में उनकी सियासत खत्म हो सकती है।

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