उपग्रह चित्रों में जैश कैंप स्थित भवनों को उतना नुकसान नहीं पहुंचा है जितना कि मोदी सरकार बता रही है

एयर स्ट्राइक,

नई दिल्ली: पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंप के एक न्यूज़ वेब साइट को  प्राप्त शुरुआती उपग्रह चित्रों में चित्रों में वहां इमारत की लोहे की शीट वाली छतों पर चार काले धब्बे नज़र आते हैं. इस कैंप को भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी को हवाई हमले का निशाना बनाया था. ये तस्वीरें भारतीय हमले के पांच दिन बाद, 4 मार्च को ली गई हैं.26 फरवरी के हमले के बाद वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों और रक्षा सूत्रों ने बताया था कि भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के मनसेहरा जिले के बालाकोट स्थित जैश के शिविर को निशाना बनाया है.

इससे इस बात की संभावना के संकेत मिलते हैं कि भारतीय वायुसेना के स्मार्ट बमों ने संभवत: लोहे की शीट वाली छतों को भेद दिया था, जिन्हें नई शीटों की सहायता से मरम्मत कर नए सिरे पेंट कर दिया गया है.
परंतु जैश कैंप स्थित भवनों के ढांचों और दीवारों को शायद उतना नुकसान नहीं पहुंचा है जितना कि मोदी सरकार बता रही है.उपग्रह चित्रों से ये भी जाहिर होता है कि हमले से पहले वहां नजर आने वाले टेन्ट अब गायब हैं.
हमले से पहले की एक तस्वीर में वहां 17 मी. X 6 मी. आकार के दो बड़े टेन्ट थे. लेकिन 4 मार्च को ली गई नवीनतम तस्वीरों में ये टेन्ट गायब हैं. इसका यही मतलब है कि या तो उन्हें हटा दिया गया या वे भारतीय वायुसेना की बमबारी में ध्वस्त हो गए.भारत विमानों से जैश कैम्प पर हमला कर पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपना इरादा जताने में कामयाब रहा है कि भारत की ज़मीन पर आतंकवादी हमले की स्थिति में वह पाकिस्तान के भीतर घुसकर जवाब दे सकता है, और देगा भी.

विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा था कि ‘भारत ने बालाकोट में जैश के सबसे बड़े प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाया है. इस ऑपरेशन में बड़ी संख्या में जैश के आतंकवादी, प्रशिक्षक, सीनियर कमांडर और फिदायीन हमलों की ट्रेनिंग पा रहे जिहादियों के समूहों का खात्मा कर दिया गया. बालाकोट का यह शिविर जैश प्रमुख मसूद अज़हर के जीजा मौलाना युसूफ़ अज़हर (उर्फ उस्ताद गौरी) के नेतृत्व में चलाया जा रहा था.’गोखले ने हमले का निशाना बने शिविर की अवस्थिति का ब्योरा देते हुए उसे ‘असैनिक आबादी से बहुत दूर घने जंगलों में पहाड़ी की एक चोटी पर स्थित’ बताया था. उनसे मिली सूचना के आधार पर ये माना गया था कि हमले का निशाना जब्बा टॉप नामक पहाड़ी की चोटी पर स्थित जैश के शिविर को बनाया गया था, जो बालाकोट और मनसेहरा के मध्य स्थित जब्बा कस्बे के पास स्थित है.
यह शिविर नियंत्रण रेखा से करीब 65 किलोमीटर दूर है और माना जाता है कि हमले के वक़्त वहां कोई 200-300 आतंकवादी मौजूद थे. जैश का यह शिविर करीब 50 हेक्टेयर इलाके में फैला हुआ है, और यह नज़र रखने के अधिकांश खुफिया साधनों की पहुंच से बहुत दूर है.
चार काले धब्बेपहले उपग्रह चित्र से संकेत मिलता है कि जब्बा टॉप स्थिति अधिकांश निर्माण अब भी सुरक्षित मौजूद हैं. लेकिन मुख्य भवन के ऊपर चार गहरे धब्बे दिख रहे हैं, जो संभवत: इस बात को जाहिर करते हैं कि छत में लोहे की नई शीटें लगाकर उन्हें रंगा गया है.

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#भारतीय वायुसेना #विदेश सचिव विजय गोखले जैश-ए-मोहम्मद मोदी सरकार

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