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केजरीवाल को सताई चिंता, हाथ मिलाने के लिए झटपटाए

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज डेस्क, देवेन्द्र कुमार। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को लोकसभा चुनाव की चिंता सताने लगी है। केजरीवाल चुनावों को लेकर बोखला गए हैं। वो कभी गिड़गिड़ाते हैं तो कभी बद्दुआ देते हैं। आम आदमी पार्टी (‘आप’) के संयोजक अरविंद केजरीवाल पिछले एक सप्ताह में तीन बातें कह चुके हैं। पहली बात उन्होंने कही कि – दिल्ली में आम आदमी पार्टी सातों सीटें जीतेगी और कांग्रेस के सारे उम्मीदवारों की जमानतें जब्त हो जाएँगी। दूसरी बात – पंजाब में गठबंधन की बात चल रही है और सांसद भगवंत मान दो-तीन दिन में पूरा ख़ुलासा करेंगे और तीसरी बात में उन्होंने कहा कि – राहुल गाँधी विचार करें, दिल्ली में नहीं तो हरियाणा में ही समझौता कर लें। इस बात से जाहिर है कि आने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर केजरीवाल की चिंता बढ़ गई है। केजरीवाल दिल्ली में कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने के लिए बहुत लालायित रहे हैं।

समझौते के लिए कांग्रेस पर डलवाया दबाव

अरविंद केजरीवाल ने गठबंधन करने के लिए ममता बनर्जी और चंद्रबाबू नायडू के मार्फत कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी पर दबाव भी डलवाया है। उन्होंने देश प्रेम की दुहाई देते हुए मोदी-शाह की जोड़ी को हानिकारक बताते हुए भी विपक्ष की एकता की कसम याद दिलाई। इतना होने के बाद भी दिल्ली में कांग्रेस के साथ ‘आप’ का समझौता नहीं हो सका। दिल्ली में समझौता नहीं होने पर केजरीवाल ने कांग्रेस को बद्दुआएँ भी दीं और कहा कि जाओ दिल्ली की सातों सीटों पर तुम्हारी जमानत जब्त होगी। इतना होने के बाद भी एक बार फिर पंजाब और हरियाणा में कांग्रेस का साथ लेने के लिए उन्होंने कांग्रेस से फिर गुहार लगाते हुए कहा कि दिल्ली में नहीं तो हरियाणा में गठबंधन कर लो। केजरीवाल इस बार खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। हालत यह हो गई है कि उन्हें लग रहा है कि कहीं लोकसभा में ‘आप’ जीरो न हो जाए। यही वजह है कि वह कांग्रेस के सामने कभी समझौते की पेशकश करते हैं तो कभी गिड़गिड़ाते हैं और कभी बद्दुआ देते हैं। पिछले लोकसभा चुनावों में दिल्ली में बीजेपी को 46 फ़ीसदी, आप को 33 फ़ीसदी और कांग्रेस को 15 फ़ीसदी वोट मिले थे। आम आदमी पार्टी व कांग्रेस दोनों को मिले वोटों को अगर मिला दिया जाए तो बीजेपी को मोदी लहर में भी हराया जा सकता था। 2014 के लोकसभा चुनावों में दिल्ली की 7 सीटों में से 6 सीटें ऐसी थी कि अगर इन सभी सीटों पर कांग्रेस और ‘आप’ को मिले वोटों को मिला दिया जाए तो ये वोट बीजेपी को मिले वोटों से ज्यादा थे। सिर्फ़ पश्चिमी दिल्ली सीट पर ही जीत का अंतर इन दोनों पार्टियों के वोटों से ज़्यादा था। इसी आधार पर केजरीवाल कह रहे हैं कि हम मिलकर बीजेपी को हरा सकते हैं।

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