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क्या नीरव मोदी को जमानत मिल सकती है ?

लोकसभा 2019,

नीरव मोदी को २९ मार्च तक हिरासत में भेज दिया गया है, हीरा कारोबारी नीरव मोदी की लंदन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी है.

गौरतलब है की नीरव मोदी को लंदन के होल्बोर्न इलाक़े से मंगलवार को गिरफ़्तार किया गया था जिसके बाद उन्हें बुधवार को लंदन के वेस्टमिंस्टर कोर्ट में पेश किया गया,देश विदेश की जानीमानी लीगल फर्म इस बारे में कहती है की अभी तो नीरव को कस्टडी में रखा गया है, लेकिन बाद में उसे जमानत मिल सकती है। आख़िर नीरव मोदी की ज़मानत याचिका ख़ारिज होने का मतलब क्या है. भारत के लिए इसका बहुत ही सीधा अर्थ है ज़मानत याचिका ख़ारिज होने का मतलब है कि भारत सरकार ने क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस को अच्छे सबूत दिए हैं, जिसने कोर्ट में यह पेश किया होगा कि नीरव मोदी क्रिमिनल फ्रॉड में शामिल हैं. 29 मार्च के बाद नीरव मोदी कस्टडी से छूट सकते हैं. लेकिन अगर भारत सरकार क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के पास आवेदन कर दे कि वो उसकी आगे की ज़मानत को ख़ारिज कर दें तो उनकी ज़मानत वहीं रोक दी जायेगी. क्योंकि अगर उन्हें छोड़ दिया गया तो वो यूके से भाग सकते हैं. और अगर वो भाग कर किसी ऐसे देश में पहुंच गए जहां भारत से अच्छे संबंध ही नहीं है तो उसे वापस लाने में बहुत ही परेशानी होगी.अगर भारत सरकार और क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने उनकी जमानत को रोकने के लिए आवेदन दिया तो वो 29 मार्च के बाद विरोध कर सकते हैं और मजिस्ट्रेट को बोल सकते हैं कि ये सही नहीं हो रहा है ये सब ग़लत हो रहा है और उसने सबूत दे दिए तो हो सकता है कि मजिस्ट्रेट उसे जमानत भी दे दें. ये पूरा फ़ैसला जज के हाथ में हैं,नीरव मोदी के ख़िलाफ़ भारत सरकार का केस काफ़ी मजबूत है.नीरव मोदी की जमानत याचिका ख़ारिज होना ही बताता है कि भारत का केस कितना मजबूत है. लेकिन पहले क्या होता था भारतीय सरकार क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस से आवेदन करवाता था लेकिन सीपीएस भारत सरकार का इतना साथ नहीं देता था. लेकिन मोदी सरकार ने पूरा साथ दिया है इसलिए जमानत याचिका ख़ारिज हुई

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