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क्या है जेनेवा समझौता, जिसके जरिए पाक से सुरक्षित लौटेंगे विंग कमांडर अभिनंदन

एयर स्ट्राइक,

ले पंगा न्यूज़ डेस्क, तीर्थराज । पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वासुसेना की एयर स्ट्राइक से बौखलाए पाकिस्तानी के विमान भारतीय सीमा में घुस आए, इन पाकिस्तानी विमान के खिलाफ कार्रवाई के दौरान भारतीय वायुसेना का एक मिग 21 दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। साथ ही भारत सरकार ने पुष्टि की कि पाकिस्तान ने वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को बंदी बना लिया है। जिसके बाद लगातार भारत द्वारा जेनेवा समझौते के तहत विंग कमांडर अभिनंदन को सुरक्षित भारत भेजने के लिए दबाव बनाया गया। आखिरकार पाकिस्तान ने घुटने टेक दिये और संसद में पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने ऐलान किया कि शुक्रवार को भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन को सकुशल भारत भेजा जाएगा। इमरान खान ने इसे दोनों देशों में शांति के लिए पाकिस्तान की पहल बताया है। जानिये कि क्या है जेनेवा समझौता, जिसे लेकर दोगले पाकिस्तान को आखिरकार विंग कमांडर को लौटाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

जानिए, क्या है जेनेवा समझौता

बता दें कि एक अंतरराष्ट्रीय युद्ध संधि, पाकिस्तान द्वारा बुधवार को भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन के लिए पाकिस्तान में सुरक्षा कवच का काम करेगी। जिसे जेनेवा कन्‍वेंशन या जेनेवा समझौता कहा जाता है। जिसके अनुसार किसी देश का सैनिक जैसे ही पकड़ा जाता है उस पर ये समझौता लागू होता है। किसी भी युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव नहीं करने के लिए ये समझौता विवश करता है।

क्या मुख्य बातें हैं जेनेवा समझौते की

जेनेवा समझौते को लेकर राजनीति विज्ञान के विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग देशों के बीच उनके राजनयिकों और नागरिकों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए जेनेवा कनवेंशन अहम हथियार है। इस समझौते के तहत युद्धबंदियों को सही सलामत उसके देश को वापस लौटाना होता है। इस समझौते को जेनेवा सम्मेलन में चार संधियां और तीन अतिरिक्त प्रोटोकॉल यानी मसौदे को मंजूरी देते हुए पास किया गया था, जो युद्धबंदियों को अधिकार देते हैं। इसका उद्देश्य युद्ध के दौरान मानवीय मूल्यों को बनाए रखना है। इस समझौते के तहत घायल सैनिक की उचित देखरेख की जाएगी और अमानवीय बर्ताव नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही युद्धबंदियों को खाना पीना और जरूरी सभी चीजें उपलब्ध करवाई जाएंगी।

इस समझौते के तहत सिर्फ नाम और पद ही पूछा जा सकता है

युद्धबंदियों को अधिकार देने वाले इस जेनेवा कन्वेंशन के तहत दुश्मन देश में ना तो उन्हें तंग किया जाएगा, न डराया धमकाया जाएगा। साथ ही अपमानित नहीं किये जाने के अलावा ना ही मेडिकल सुविधा से वंचित रखा जाएगा। यहां तक कि युद्धबंदी की जाति, धर्म के बारे में नहीं पूछे जाने का प्रावधान है। युद्धबंदी से सिर्फ उसका नाम, सेना में पद और यूनिट के बारे में पूछा जा सकता है। बता दें कि, पहला जेनेवा समझौता 1864 में हुआ था, इसके बाद दूसरा समझौता 1906 और तीसरा 1929 में हुआ था। दूसरे वर्ल्ड वार के बाद 1949 में 194 देशों ने मिलकर चौथी संधि की थी। इसके तहत युद्धबंदियों पर मुकदमा चलाया जा सकता है, लेकिन युद्धबंदी को लेकर प्रोपेगेंडा नहीं फैलाया जा सकता। हांलाकि भारतीय विंग कमांडर को पाकिस्तान के पीएम इमरान खान द्वारा शुक्रवार को रिहा करने की बात कही गई है।

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