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क्यों खास है राजस्थान की झुंझुंनू लोकसभा सीट

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज डेस्क, देवेन्द्र कुमार। लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों की घोषणा के बाद से ही देशभर में चुनाव प्रचार का दौर चल पड़ा है। सभी राजनीतिक दल आमचुनाव की तैयारी में लग गए हैं। राजनीतिक पार्टियों द्वारा विपक्ष के बागी नेताओं को अपनी पार्टी में मिलाने का दौर चल रहा है। जगह-जगह रैलियां शुरू हो गई हैं। राजनीतिक दल मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए विपक्ष की पार्टियों की कमियां गिना रहे हैं। और आम जनता से वादे कर रहे हैं। इस दौर में राजस्थान की राजनीति की चर्चा करते हैं। राजस्थान के उस लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र की बात करते हैं जिसे देशभर में सैनिकों व शूरवीरों की भूमि कहा जाती है।

झुंझुनूं लोकसभा सीट

राजस्थान के झुंझुनूं की लोकसभा सीट जाट बहुल सीट मानी जाती है। यह सीट सामान्य है। आजादी के बाद से इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा है। यह लोकसभा क्षेत्र हरियाणा राज्य की सीमा से सटा हुआ है। झुंझुनूं संसदीय क्षेत्र में कुल सात विधानसभा क्षेत्र हैं, जिसमें झुंझुनूं, खेतड़ी, मंडावा, सूरजगढ़, पिलानी उदयपुरवाटी, नवलगढ़ और सीकर जिले का फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र शामिल है। यहां पर जाट सबसे अधिक हैं, जाटों के बाद इस सीट पर दूसरे नंबर पर मुस्लिम आबादी का वर्चस्व है। इस क्षेत्र का सबसे बड़ा मुद्दा नहर के द्वारा पानी लाने का रहता है। इसी मुद्दे को लेकर राजनीतिक पार्टियां अपना हित साधती हैं। लेकिन कोई भी पार्टी नहर द्वारा पानी लाने का वादा पूरा नहीं कर पाई है।

इस सीट पर 2014 में पहली बार आई थी बीजेपी

झुंझुनूं लोकसभा सीट पर बीजेपी कभी अपनी जीत दर्ज नहीं कर पाई थी। लेकिन 2014 के चुनाव में पहली बार मोदी लहर ने इस सीट को बीजेपी की झोली में डाल दिया। 2014 में यहां से बीजेपी के संतोष अहलावत ने जीत हासिल की थी। जो अभी मौजूदा सांसद हैं। बीजेपी ने इस पर आजादी के बाद से केवल एक बार जीत दर्ज की है। इसके अलावा इस सीट से कांग्रेस 12 बार व दो बार जनता दल और एक बार भारतीय लोक दल ने विजय पाई है। कांग्रेस के कद्दावर नेता शीशराम ओला का इस संसदीय क्षेत्र में दबदबा रहा है। ओला यहां से लगातार पांच बार चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं। 2014 में मोदी लहर ने उनकी जीत के इस रथ को विराम दे दिया था।

जानिए क्या है इस सीट का इतिहास

आजादी के बाद पहली बार 1952 में झुंझुनूं लोकसभा सीट पर चुनाव हुए थे। इस समय कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। कांग्रेस ने लगातार पांच बार 1952, 1957, 1962, 1967, 1971 में इस संसदीय सीट से चुनाव जीता। इसके बाद 1977 में भारतीय लोकदल तथा 1980 का चुनाव जनता पार्टी ने जीता। 1984 का चुनाव कांग्रेस ने एक बार फिर से जीता, लेकिन उसे 1989 में जनता पार्टी के सामने हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद फिर से कांग्रेस ने दोबारा जबरदस्त वापसी की, और 1991, 1996, 1998, 1999, 2004, 2009 का चुनाव जीता। इस तरह बीजेपी अभी तक इस सीट पर चुनाव नहीं जीत पाई थी। लेकिन साल 2014 में उसे जीत हासिल हो सकी। कांग्रेस के नेता शीशराम ओला 1996 से लेकर 2014 तक लगातार सांसद रहे।

जानिए क्या है इस सीट से मतदाओं का गणित

झुंझुनूं संसदीय सीट पर कुल 16 लाख, 69 हजार, 243 मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें से 2014 के लोकसभा चुनाव में 10 लाख, 1 हजार, 549 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। यह कुल मतदाओं का 60 फीसदी था। बीजेपी से संतोष अहलावत इस सीट से उम्मीदवार थे। अहलावत के खाते में 4 लाख, 88 हजार, 182 वोट गए थे। कांग्रेस के शीशराम ओला को केवल 2 लाख, 54 हजार, 347 वोट मिले थे। कुल मिलाकर बीजेपी ने कांग्रेस को 2 लाख, 33 हजार, 835 वोटों के भारी अंतर से हराया था।

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