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गांधीजी की हत्या के बाद गोडसे जो बताया उसे जानकर आप हो जाएगें हैरान

राजनीति,

ले पंगा न्यूज। देवेन्द्र कुमार। 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान फिल्म से राजनीति में आए कमल हासन द्वारा नाथूराम गोडसे को लेकर दिए गए बयान से विवाद खड़ा हो गया है। बता दें कि कमल हासन ने चुनाव प्रचार के दौरान अपने भाषण में नाथूराम गोडसे को आजाद भारत का पहला आतंकवादी बताया था। कमल हासन अरवाकुरिची विधानसभा क्षेत्र में प्रचार कर रहे थे, इस सीट पर 19 मई को उपचुनाव होगा। हासन ने कुछ दिन पहले ही मक्कल निधि मय्यम पार्टी का गठन किया था।

कमल हासन ने प्रचार के दौरान इस बयान के साथ ही कहा, ‘मैं ये इसलिए नहीं कह रहा कि यहां काफी संख्या में मुसलमान हैं। मैं ये महात्मा गांधी की मूर्ति के सामने खड़ा हूं इसलिए कह रहा हूं। आजाद भारत में पहला आतंकवादी एक हिंदू था। और उसका नाम था- नाथूराम गोडसे।’

इस दौरान हासन ने यह भी कहा कि वो भारत में एकता चाहते हैं। हासन ने कहा की मैं यहां पर 1948 में महात्मा गांधी की हत्या को लेकर जवाब मांगने आया हूं।

जानिए क्या कहा था नाथूराम गोडसे ने

नाथूराम गोडसे ने एक बार जेल के अंदर ही गांधी-हत्या का ज़िक्र करते हुए गोपाल गोडसे को बताया था, “30 जनवरी को मैंने छह गोलियों से लोड अपने रिवॉल्वर को लेकर बिड़ला हाऊस में शाम 4.55 बजे प्रवेश किया। रक्षकों ने मेरी तलाशी नहीं ली। 5.10 बजे गांधीजी मनु गांधी और आभा गांधी के कंधे पर हाथ रखे बाहर निकले। जैसे ही मेरे सामने आए सबसे पहले मैंने देश की शानदार और महान सेवा के लिए ‘नमस्ते’ कहकर उनका अभिवादन किया और देश का नुकसान करने के लिए उन्हें ख़त्म करने के उद्देश्य से दोनों कन्याओं को उनसे दूर किया और फिर 5.17 बजे 3 गोलियां गांधीजी के सीने में उतार दी।”

नाथूराम ने आगे बताया- “दरअसल, मेरी गोली जैसे ही चली, गांधीजी के साथ चल रहे 10-12 लोग दूर भाग गए। मुझे लगा था कि जैसे ही मैं गांधीजी को मारूंगा, मेरी हत्या कर दी जाएगी, लेकिन सब लोग आतंकित होकर दूर भाग गए। मैंने गांधीजी की हत्या करने के बाद रिवॉल्वर समेत हाथ ऊपर उठा लिया। मैं चाहते था, कोई मुझे गिरफ़्तार कर ले। लेकिन कोई मेरे पास आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। मैं पुलिस-पुलिस चिल्लाया। फिर मैंने एक सिपाही को आंखों से संकेत किया कि मेरी रिवॉल्वर ले लो। उसे विश्वास हो गया कि मैं उसे नहीं मारूंगा और वह हिम्मत जुटाकर मेरे पास आया और मेरा हाथ पकड़ लिया। इसके बाद लोग मुझ पर टूट पड़े और मुझे मारने लगे।”

इसके बाद डीएसपी जसवंत सिंह के आदेश पर पुलिस नाथूराम को तुगलक रोड थाने ले गई और रात को क़रीब पौने दस बजे बापू की हत्या की एफ़आईआर लिखी। थाने के दीवान-मुंशी दीवान डालू राम ने एफआईआर लिखी थी।

आकाशवाणी पर दी गई थी गांधी जी के निधन की सूचना

बापू की हत्या की सूचना आकाशवाणी पर दी गई थी। बापू की घटना की सूचना सुनते ही देश हैरान रह गया था। जब शाम के 5 बजकर 45 मिनट पर आकाशवाणी ने इस बात की सूचना दी की नाथूराम गोडसे नाम के किसी व्यक्ति ने बापू की हत्या कर दी है। तो इस पर पूरा सारा देश हैरान रह गया कि मराठी युवक ने यह काम क्यों किया, क्योंकि लोगों को आशंका थी कि कोई पंजाबी या सिंधी व्यक्ति गांधीजी की हत्या कर सकता है।

बता दें कि गांधीजी हत्या में नाथूराम के साथ नारायाण आप्टे, मदनलाल पाहवा, गोपाल गोडसे, विष्णु करकरे, विनायक सावरकर, शंकर किस्तैया और दिगंबर बड़गे गिरफ्तार कर लिए गए थे। बाद में दिगंबर बड़गे वादा माफ़ सरकारी गवाह बन गए। बाद उनकी गवाही को ही आधार मानकर नाथूराम को फ़ांसी दी गई।

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