ग्रामीण भारत में करोड़ों अस्थायी मजदूरों का छिना रोजगार

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ले पंगा न्यूज डेस्क अशोक योगी। भारत की आधे से ज्यादा आबादी गांवों में निवास करती है। इसलिए भारतीय गांवों में रोजगार की अधिक उपलब्ध होना चाहिए, लेकिन ग्रामीण भारत में 2011-12 और 2017-18 के बीच करीब 3.2 करोड़ अस्थायी मजदूरों (कैजुअल लेबरर) से उनका रोजगार छिन गया। इनमें से करीब तीन करोड़ मजदूर खेतों में काम करने वाले जनता थी।
एक न्यूजपेपर की एक रिपोर्ट से ये जानकारी सामने आई है। इस रिपोर्ट में राष्ट्री य प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) की ओर से साल 2017-2018 में किए गए आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के हवाले से बताया गया है कि 2011-12 से लेकर 2017-18 के बीच खेत में काम करने वाले अस्थायी मजदूरों में 40 फीसदी की गिरावट आई है।

सरकार ने सर्वेक्षण जारी करने से किया मना

इस रिपोर्ट की खास बात ये है कि सरकार ने इस सर्वेक्षण को जारी करने से मना कर दिया है। गौरतलब है कि अस्थायी मजदूर (कैजुअल लेबरर) उन्हें कहते हैं जिन्हें जरूरत के मुताबिक समय-समय पर यानि कि अस्थायी रूप से काम पर रखा जाता है। एनएसएसओ के आंकड़ों के मुताबिक, 2011-12 के बाद से ग्रामीण अस्थायी श्रम खंड (खेत और गैर-खेती) में पुरुष मजदूरों के रोजगार में 7.3 प्रतिशत और महिला मजदूरों के रोजगार में 3.3 प्रतिशत की कमी आई है। इस कारण कुल 3.2 करोड़ रोजगार छिन गया है। इस क्षति का एक बड़ा हिस्सा लगभग तीन करोड़ कृषि पर निर्भर है, वहीं गैर-कृषि क्षेत्र में मामूली गिरावट (13.5 प्रतिशत से 12.9 प्रतिशत तक) आई है।

पुरुष कामगारों की भी घटी संख्या

गौरतलब है कि दिसंबर 2018 में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) की ओर से स्वीकृति दिए जाने के बाद भी अभी तक सरकार ने एनएसएसओ की रिपोर्ट को जारी नहीं किया है। एनएससी के दो सदस्यों, जिसमें इसके कार्यवाहक अध्यक्ष पीएन मोहनन शामिल हैं, ना रिपोर्ट को जारी नहीं करने के विरोध में इस साल जनवरी के अंत में इस्तीफा दे दिया था। इससे पहले ये रिपोर्ट आई थी कि देश में 1993-1994 के बाद पहली बार पुरुष कामगारों की संख्या घटी है। नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की रिपोर्ट के मुताबिक देश में पुरुष कामगारों की संख्या लगातार घटती जा रही है। एक न्यूजपेपर की रिपोर्ट में यह आंकड़े सामने आये हैं। इस रिपोर्ट में एनएसएसओ की ओर से साल 2017-2018 में किए गए आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के हवाले से बताया गया है कि देश में पुरुष कामगारों की संख्या तेजी से घट रही है। 2017-18 में पुरुष कामगारों की संख्या में 28.6 करोड़ थी, जो कि 2011-12, जब एनएसएसओ द्वारा पिछले सर्वे किया गया था, में 30.4 करोड़ थी. उससे पहले साल 1993-94 में यह संख्या 21.9 करोड़ थी, यानी आंकड़े दिखाते हैं कि पिछले पांच सालों की तुलना में 2017-18 में देश में रोजगार अवसर बहुत कम हुए हैं।

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