चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की मांग खारिज, जानिए क्या कहा चुनाव आयोग ने

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज। देवेन्द्र कुमार। चुनाव आयोग में चल रहे घमाशान में अब एक और खबर सामने आई है। खबर यह है कि चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने चुनाव आयोग के सामने जो मांग रखी थी उसे आयोग ने खारिज कर दिया है। बता दें की इस मांग में लवासा ने कहा था कि चुनाव आयोग की ओर से लिए जाने फैसलों में असहमति को रिकॉर्ड किया जाए और इसे सार्वजनिक भी किया जाए। अशोक लवासा की ओर से कि गई इस मांग पर चुनाव आयोग ने मंगलवार को बैठक की। बैठक में यह फैसला लिया गया कि असहमति को रिकॉर्ड तो किया जाएगा लेकिन उसे फैसले में सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

आइए यह जान लेते हैं कि ये पूरा मामला क्या था

मामला यह था कि चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों में चुनाव आयोग ने पीएम मोदी और अमित शाह को क्लीन चिट दे दी थी। मोदी व शाह को आचार संहिता के उल्लंघन के मामले क्लीन चिट मिलने के बाद चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार अशोक लावासा ने इन दोनों नेताओं को मिलने वाली क्लीन टिट के 5 मामलों पर अपनी आपत्ति जतायी और इसका विरोध किया।

अगर नियमों की बात करें तो तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में जो फैसला लिया जाता है वो बहुमत के आधार पर लिया जाता है। मोदी व अमित शाह के क्लीन चिट के मामले में भी यहीं हुआ। इस मामले में जब सुनवाई की जा रही थी तब मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा और चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा, पीएम मोदी और अमित शाह को क्लीन चिट देने के पक्ष में थे। लेकिन अशोक लवासा इसका विरोध कर रहे थे। लेकिन नियमों के मुताबिक बहुमत के आधार पर फैसला लिया गया और अशोक लवासा के विरोध को दरकिनार करते हुए चुनाव आयोग ने पीएम व बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को क्लीन चिट दे दी।
इसके बाद चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने 16 मई को मांग की कि चुनाव आयोग की बैठकों में किसी मामले पर यदि किसी सदस्य की असहमति रहती है उसको भी सार्वजनिक किया जाए और रिकॉर्ड किया भी किया जाए।

अब चुनाव आयोग ने बताया कि बैठक में चर्चा के बाद यह फैसला किया गया है कि आयोग की बैठक में सभी सदस्यों की राय को रिकॉर्ड में रखा जाएगा,लेकिन इसे सार्वजनिक फैसले में शामिल नहीं किया जाएगा। आयोग ने इस फैसले के पिछे जो तर्क दिया है वो यह है कि चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन कोई न्यायिक मामला नहीं है, ऐसे में इसे सार्वजनिक करने की कोई जरुरत नहीं है और यह सिर्फ फाइलों में ही रहेगा। आयोग ने यह भी बताया कि फाइलों में दर्ज राय के बारे में आरटीआई के जरिए जानकारी ली जा सकती है। मंगलवार को हुई चुनाव आयोग की इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा, चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा के साथ ही खुद अशोक लावासा के साथ ही खुद मौजूद थे।

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