चेन्‍नई इंडियन के अपने चौथे मैच में मुंबई के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम में उतरेगी

IPL-2019,

जीत की हैट्रिक लगा चुकी महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई वाली चेन्‍नई इंडियन टी-20 लीग के अपने चौथे मैच में बुधवार को मेजबान मुंबई के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम में उतरेगी।
मुंबई को पिछले मैच में पंजाब के हाथों हार मिली थी। उसके हिस्से तीन मैचों में सिर्फ एक ही जीत आई है जबकि दो हार उसे मिली है। बावजूद इसके मुंबई को हल्के में लेना किसी भी टीम के लिए सही नहीं होगा।
चेन्नई अंकतालिका में बेशक पहले स्थान पर है लेकिन उसे छठे स्थान पर मौजूद मुंबई से सावधान रहने की जरूरत है। चेन्नई अच्छी फॉर्म में हैं और उसका हर खिलाड़ी अपने तरीके से टीम के प्रदर्शन में योगदान दे रहा है। पिछले मैच में टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने शानदार पारी खेल न सिर्फ टीम को संकट से निकाला था बल्कि टीम की जीत की नींव भी रखी थी।
चेन्नई की बल्लेबाजी और गेंदबाजी में गहराई है। बल्लेबाजी में उसके पास शेन वॉटसन, सुरेश रैना, केदार जाधव और अंबाती रायडू जैसे अनुभवी और कभी भी मैच को बदलने वाले खिलाड़ी हैं।
मुंबई में वो तालमेल नहीं दिखा है जो उसके पास मौजूद है। मैदान पर उसके खिलाड़ी लय में नहीं दिखे हैं। बल्लेबाजी में दक्षिण अफ्रीका के क्विंटन डी कॉक ही कुछ कमाल दिखा पाए हैं जबकि रोहित शर्मा, कीरोन पोलार्ड का बल्ला खामोश रहा है।

आईपीएल 2018 की विजेता चेन्नई सुपर किंग्स टीम ने 12वें सीजन में भी अपना जलवा कायम रखा है। राजस्थान के खिलाफ रविवार को खेले मैच में चेन्नई ने लगातार तीसरी जीत दर्ज की और अंकतालिका में नंबर एक पर कब्जा किया। चेपॉक स्टेडियम में खेले गए इस मैच में सीएसके टीम से कई शानदार प्रदर्शन देखने को मिले। ये हैं चेन्नई की जीत के फैक्टर-

राजस्थान के खिलाफ चेन्नई की जीत की सबसे बड़े नायक रहे कप्तान महेंद्र सिंह धोनी। चेपॉक की पिच पर टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए चेन्नई ने 27 रन के स्कोर पर तीनों शीर्ष क्रम बल्लेबाजों के विकेट खो दिए थे। पिच बल् मुश्किल थी लेकिन धोनी ने सुरेश रैना के साथ मिलकर अर्धशतकीय साझेदारी बनाई। चेन्नई फैंस को इस मैच में धोनी और रैना को लंबे समय बाद साथ बल्लेबाजी करते देखने को मिला।

धोनी ने शुरुआत जरूर धीमी की लेकिन वो अच्छे से जानते थे जैसे जैसे ओस पड़ेगी बल्लेबाजी आसान हो जाएगी। उन्हें केवल विकेट बचाकर उस समय तक क्रीज पर टिके रहना था। धोनी ने 163.04 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए 46 गेंदो पर चार चौके और चार छक्कों की मदद से 75 रन बनाए। माही ने आखिरी ओवर में जयदेव उनादकट के खिलाफ लगातार तीन छक्के जड़कर फैंस को विंटेज धोनी की याद दिलाई।

ब्रावो:

चेन्नई टीम के पास हैदराबाद या मुंबई फ्रेंचाइजी की तरह कोई ‘डेथ ओवर स्पेशलिस्ट’ गेंदबाज नहीं है लेकिन ड्वेन जॉनसन ब्रावो अपनी टीम के लिए ये जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं। टॉस हारते ही साफ हो गया था कि चेन्नई टीम को ओस से भरी पिच पर दूसरी पारी में गेंदबाजी करनी होगी, जो कि आसान नहीं होने वाला था लेकिन चेन्नई के गेंदबाजों, खासकर कि ब्रावो ने शानदार प्रदर्शन किया। 18वें ओवर में ब्रावो ने जहां 19 रन दिए थे, वहीं आखिरी ओवर में उन्होंने 12 रन बचा भी लिए, जबकि क्रीज पर जोफ्रा ऑर्चर जैसा खिलाड़ी मौजूद था। ब्रावो ने 4 ओवर में 32 रन देकर दो विकेट लिए।

इमरान ताहिर:

सीनियर गेंदबाज इमरान ताहिर ने राजस्थान के खिलाफ मैच में अहम भूमिका निभाई। ब्रावो ने अगर डेथ ओवरों में रन बचाए, तो ताहिर ने बीच के ओवरों में साझेदारियां तोड़ने का काम किया। ताहिर ने अहम मौकों पर राहुल त्रिपाठी (39) और फिर स्टीवन स्मिथ (28) का विकेट लेकर चेन्नई की जीत आसान की। ताहिर ने पर्पल कैप पर भी कब्जा जमाया।

बेहतरीन फील्डिंग:

कैप्टन कूल धोनी खुद भी मानते हैं कि सीएसके की फील्डिंग उनका सबसे मजबूत पक्ष नहीं है। टीम में कई सीनियर खिलाड़ी हैं जिनकी फिटनेस के साथ कप्तान खतरा नहीं उठाना चाहते इसलिए वो उन्हें ज्यादा पुश भी नहीं करते। लेकिन राजस्थान के खिलाफ मैच में चेन्नई के खिलाड़ियों ने शानदार फील्डिंग दिखाई। रविंद्र जडेजा और सुरेश रैना ने कई हैरतअंगेज और मुश्किल कैच पकड़े।

दीपक चाहर:

राजस्थान के दीपक चाहर पिछले सीजन से अब तक चेन्नई के सबसे अहम गेंदबाज बन गए है। चाहर सीएसके के लिए नई गेंद से अटैक की शुरुआत करते हैं और पावरप्ले में विकेट निकालते हैं। राजस्थान के खिलाफ मैच में भी उन्होंने यही काम किया। चाहर ने पहले ही ओवर में विपक्षी कप्तान अजिंक्य रहाणे को चलता किया और फिर तीसरे ओवर में संजू सैमसन का विकेट निकाला। चाहर ने 4 ओवर में 19 रन देकर एक मेडन ओवर के साथ 2 विकेट हासिल किए।

टॉस हारने के बाद धोनी ने जो रणनीति बनाई थी, वो शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को विकेट मिलने पर निर्भर थी। क्योंकि अगर शुरू के पांच ओवरों में विकेट नहीं मिलते तो ओस के आने के साथ स्पिनर्स का काम और मुश्किल होता चला जाता। चाहर ने कप्तान के लिए वो काम किया।

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