चैत्र और शारदीय नवरात्रि में होती है देवी की पूजा

चैत्र और शारदीय नवरात्रि में होती है देवी की पूजा

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ले पंगा न्यूज डेस्क, अशोक योगी। शनिवार से चैत्र नवरात्रि पर्व प्रारम्भ हो रहे है। नवरात्रि देवी आराधना का यह पर्व वर्ष में दो बार मनाई जाती है। पहला चैत्र और दूसरा शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। नौ दिनों तक शक्ति की देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों के रूप में उपासना की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना होती है फिर नौ दिनों तक देवी के नौ रूपों की विशेष पूजा और आराधना की जाती है। कलश स्थापना कर नवरात्रि पर समस्त देवीय शक्तियों का आह्रान कर उन्हें सक्रिय किया जाता है।

ऐसे करें कलश स्थापना

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापित किया जाता है। नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। कलश स्थापना करते ही नवरात्रि का पवित्र पर्व आरम्भ हो जाता है। घटस्थापना करते समय मिट्टी में धान बोए जाते हैं। इसके बाद गंगाजल, चंदन, फूल, दूर्वा, अक्षत, सुपारी और सिक्के कलश में रखें। कलश स्थापना के लिए एक लकड़ी का पाटा लें और उस पर नया लाल कपड़ा बिछाएं। इसके बाद नारियल और कलश पर मौली बांधे, रोली से कलश पर स्वास्तिक बनाएं। वहीं कलश में शुद्ध जल और गंगा जल रखें।

घटस्थापना का शुभ मूहूर्त

6 अप्रैल सुबह- 7:30 से 9:00 और दोपहर: 1:30 से 3:00

इस नवरात्रि में यह है खास बातें-

– चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ पर गुड़ी पड़वा और नव संवत्सर 2076 शुरू होगा।

– इस बार चैत्र नवरात्रि रेवती नक्षत्र के साथ शुरू हो रही है।

– 9 दिनों के इस चैत्र नवरात्रि में पांच बार सर्वार्थ सिद्धि और दो बार रवियोग आएगा। जो ज्योतिष दृष्टि से बहुत ही शुभ माना गया है।

– अबकी बार चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन अष्टमी और नवमी एक साथ मनाई जाएंगी।

–  चैत्र नवरात्रि अष्टमी के दिन ही सुबह 8 बजकर 19 मिनट को नवमी तिथि प्रारंभ होगी, जो अगले दिन सुबह 6 बजकर  4 मिनट तक रहेगी।

– 14 अप्रैल को राम नवमी पर इस बार पुष्य नक्षत्र योग का संयोग बन रहा है। भगवान राम का जन्म पुष्य नक्षत्र में ही हुआ था।

– भगवान राम का जन्म पुष्य नक्षत्र में दोपहर को हुआ था इसलिए राम नवमी अष्टमी के दिन मनाना शुभ रहेगा।

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