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जम्मू-कश्मीर की इस एक सीट पर तीन चरणों में होंगे चुनाव, देश में ऐसा पहली बार

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज़ डेस्क, देवेन्द्र कुमार। चुनाव आयोग ने आधिकारिक रूप से लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान रविवार को कर दिया है। चुनाव की तारीखों के एलान के बाद से ही जम्मू-कश्मीर की अनंतनाग लोकसभा सीट चर्चा में है। सम्भवत: देश में पहली बार ऐसा हो रहा है कि एक लोकसभा सीट पर तीन चरणों में चुनाव हो रहे हैं। जम्मू-कश्मीर की अनंतनाग लोकसभा सीट पर कुल तीन चरणों में चुनाव होंगे। इस संसदीय सीट की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने यह फैसला लिया है।

सुरक्षा को देखते हुए उठाया कदम

पिछले दिनों चुनाव आयोग की एक टीम ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए इस क्षेत्र का दौरा किया था। दौरा करने के बाद ही आयोग ने इस सीट पर तीन चरणों में मतदान करवाने का फैसला लिया है। दक्षिण कश्मीर का अनंतनाग पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का गृह क्षेत्र भी है, 2014 में वो यहां से सांसद बनी थीं। अनंतनाग आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। अनंतनाग सीट पर तीसरे, चौथे और पांचवें चरण यानी कि 23 अप्रैल, 29 अप्रैल और 6 मई को मतदान होगा। 23 अप्रैल को अनंतनाग सीट पर अनंतनाग जिले में, 29 अप्रैल को कुलगाम जिले में और 6 मई को शोपियां और पुलवामा में वोटिंग होगी।

6 लोकसभा सीटों पर 5 चरणों में होगा मतदान

जम्मू-कश्मीर की कुल 6 लोकसभा सीटों पर 5 चरणों में वोटिंग होगी। जिसमें 11 अप्रैल को बारामूला, जम्मू 18 अप्रैल को श्रीनगर, उधमपुर 23 अप्रैल को अनंतनाग( अनंतनाग जिले में वोटिंग) में 29 अप्रैल को अनंतनाग ( कुलगाम जिले में वोटिंग) में 6 मई को लद्दाख, अनंतनाग ( शोपियां जिले में वोटिंग) में मतदान होगा।

लोकसभा के साथ नहीं होंगे विधानसभा चुनाव

जम्मू-कश्मीर में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव भी कराया जाना था लेकिन सुरक्षा कारणों से इसे टाल दिया गया। इस फैसले के बाद नेशनल कान्फ्रेंस(एनसी) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने केंद्र की आलोचना की। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू कश्मीर में केवल लोकसभा चुनाव कराने का फैसला भारत सरकार की कुटिल सोच है। जनता को सरकार नहीं चुनने देना लोकतंत्र के सिद्धांत के खिलाफ है। लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव नहीं कराने के फैसले की राजनीतिक पार्टीयों द्वारा आलोचना करने पर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) शालिंदर कुमार ने रविवार को कहा कि जो भी फैसला लिया गया है, उसमें हमें चुनाव आयोग के विवेक का सम्मान करना चाहिए। राज्य की मौजूदा सुरक्षा स्थिति के कारण यहां साथ में चुनाव कराना संभव नहीं था।

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