जयपुर नगर निगम की हालत खस्ता है…

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ले पंगा न्यूज डेस्क, चंदना पुरोहित। स्थानीय कामों में ढिलाई निगम की आदत बन चुकी है। रोजाना के काम जब निगम नहीं कर पाता तो जन जीवन अस्त व्यस्त हो जाता है। खड़ी की गई व्यवस्थाताओं का जब पालन नहीं होता है तो वह व्यवस्थाएं बेकार हो जाती हैं। जयपुर शहर में कई अच्छी व्यवस्थाए खड़ी हैं। सफाई ,सड़क,बिजली को लेकर यह नहीं है की कोई काम नहीं हुआ है परन्तु खड़ी की गई व्यवस्था को संभालना होता है वर्ना वह चरमरा जाती है।

आज जयपुर शहर में हालत यह है की ,घरों के बाहर,सडको पर आवारा जानवर इकट्ठा हैं। कचरा गाड़ी हर गली पँहुच नहीं रही है इसलिए कचरा डालने की बड़ी समस्या जनता के सामने हैं। कचरा डालने की कोई व्यवस्था नहीं होगी तो सीधे से लोग कचरा इधर उधर फेंकने लगेंगे और गंदगी बढ़ेगी। पार्क क्षतिग्रस्त हो गए हैं।सड़क पर लाइट नहीं है। स्थिति यह है की नगर निगम में ऐसी 9000 से ज्यादा शिकायते धूल खा रही हैं।

स्थानीय शिकायतो को दूर करने के लिए नियम भी बने हैं परन्तु उनका कोई फायदा नहीं होता। नगर निगम लोक गारंटी अधिनियम 2018 के हिसाब से शिकायतों का समाधान तय समय सीमा में हो जाना चाहिए। घर से कचरा ना उठाने की शिकायत उसी दिन दूर हो जानी चाहिए। कुत्तो की नसबंदी की शिकायत के 3 दिनो में दूर हो जानी चाहिए। नाली और गलियों की सफाई 7 दिन में हो जानी चाहिए। पशुओं को पकड़ने की कार्रवाई 2 दिन में पूरी हो जानी चाहिए।

आलम यह है कि घर घर कचरा न उठाने की 4000 से अधिक शिकायते नगर निगम में लंबित हैं। सड़क पर की बिजली से संबंधित करीब 3600 शिकायतों की और ध्यान नहीं दिया गया है। सड़क- नाले की शिकायते भी करीब 700 से अधिक हैं। अतिक्रमण को लेकर भी करीब 400 शिकायतें लंबित हैं। नगर निगम अपनी जिम्मेदारीयों को निभाने में विफल साबित हो रहा है।

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