जानिये, आज भी है यह सात महामानव कलयुग में अमर

धर्म,

ले पंगा न्यूज़, मोनिका सोनी। हिन्दू इतिहास और पुराणों में बहुत सारे ऐसे रहस्य है जो साइंस की समझ से परे है। हिन्दू ग्रंथों के हिसाब से इस युग में आज भी ऐसे सात व्यक्ति हैं जो अमर और अजर हैं। यह सात व्यक्ति सारी दिव्य शक्ति से पूर्ण हैं। योग में जिन अष्ट सिद्धियों की बात कही गई है वे सारी शक्तियाँ इनमें विद्यमान है। इन सात व्यक्तियों में से कोई सतयुग से तो कोई त्रेत्रायुग से या कोई द्वापरयुग से इस दुनिया में रह रहे हैं और कलयुग के अंत तक इस दुनिया में अमर रहेंगे इनमे से हर महामानव किसी वचन से या श्राप से या वरदान के खातिर इस दुनिया में अमर हैं। आईये जानते हैं कौन हैं यह सात महामानव

हनुमान जी – हनुमान जी को कलयुग में आज भी अमर और अजर माना गया है। जब हनुमान जी सीता जी को राम जी का सन्देश पहुंचाने अशोक वाटिक आ गये थे तब सीता जी ने राम जी का सन्देश सुनने के बाद वरदान दिया था कि वो इस दुनिया में अजर और अमर रहेंगे। इसीलिए हनुमान जी को एक शक्ति का स्त्रोत भी माना गया है हनुमान जी समस्त देवी-देवताओं में से सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं। हनुमान जी भगवान शिव के अवतार हैं और उन्होंने अपनी समस्त जीवनी राम जी के सेवा में निकली है राम जी के स्वर्ग सिधारने के बाद हनुमान जी वन में संतों का रूप लेकर आज भी इस दुनिया में जीवित हैं।

कृपाचार्य – पुराणों के अनुसार, कृपाचार्य कौरवों और पांडवों के कुलगुरु थे कृपाचार्य की एक बहन भी थी कृपी। कृपी का विवाह द्रोणाचार्य से हुआ। महाभारत युद्ध के दौरान कृपाचार्य ने कौरव का साथ दिया था अतः वो कौरवों की तरफ से युद्ध में लड़े थे।

अश्वत्थामा- अश्वत्थामा भगवान शिव के अनेक अवतारों में से एक अवतार थे। अश्वत्थामा के जन्म से ही माथे पर एक मणि विराजमान थी। अश्वत्थामा एक वीर, घमंडी, स्वभावी योद्धा थे। महाभारत युद्ध में उन्होंने कौरवो का पक्ष लिया था जब महाभारत युद्ध में छल से उनके पिता का द्रोणाचार्य का वध किया गया था तब अश्वत्थामा ने रात्रिकाल में पांडवों के पुत्रों की हत्या कर दी थी तथा उत्तरा के कोख में पल रहे अभिमन्यु के वंश को भी ख़त्म करने की कोशिश की जिसके चलते श्री कृष्ण ने उत्तरा के वंश परीक्षित को बचा लिया और अश्वत्थामा के सर से मणि छीन उसे युगों तक भटकने का श्राप दे दिया।

ऋषि मार्कण्डेय- ऋषि मार्कण्डेय भगवान शिव के परम भक्त हैं। इन्होंने शिवजी को तप कर प्रसन्न किया और महामृत्युंजय मंत्र सिद्धि के कारण चिरंजीवी बन गए।

विभीषण- विभीषण रावण के छोटे भाई हैं। सीता जी को अशोक वाटिका में कैद करने पर विभीषण रावण को समझाते थे कि वो श्री राम से युद्ध न मोड़ लें जिसके चलते रावण ने उन्हें श्री लंका से बाहर निकाल दिया। तब विभीषण ने श्री राम का साथ देकर रावण का वध करवाया था और श्री राम के आशीर्वाद से युगों तक अमर हो गए।

राजा बलि- राजा बलि प्रह्लाद के वंशज थे और विष्णु जी के भक्त थे और उन्होंने अपना सब कुछ विष्णु जी के वामन अवतार को दान कर दिया था जिसके कारण उन्हें महादानी भी माना जाता है और विष्णु जी की कृपा से वो अमर हो गए।

ऋषि व्यास- ऋषि भी अष्ट चिरंजीवी हैँ और इन्होंने चारों वेद (ऋग्वेद, अथर्ववेद, सामवेद और यजुर्वेद) का सम्पादन किया था। साथ ही, इन्होंने ही सभी 18 पुराणों की रचना भी की थी। महाभारत और श्रीमद्भागवत् गीता की रचना भी वेद व्यास द्वारा ही की गई है। ऋषि व्यास को वेद व्यास के नाम से भी जाना जाता है।

परशुराम- परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं। परशुराम ने 21 बार इस दुनिया से पुरे क्षत्रिय समाज को खत्म किया हैं। परशुराम का जन्म समय सतयुग और त्रेता के संधिकाल में माना जाता है। माना जाता है कि परशुराम आज भी इस युग में अमर हैं।

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#हनुमान जी #हिन्दू इतिहास महामानव

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