…तो इस कारण पितरों के लिए खास है अमावस्या का दिन!

धर्म,

ले पंगा न्यूज डेस्क, चंदना पुरोहित। अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पितृ पक्ष माना जाता है। यह 16 दिन चलता है। इस दौरान हिन्दू धर्म के लोग अपने पूर्वजों को खास तौर पर खाना खिलाकर, श्रद्धा अर्पित करते हैं। आज पितृपक्ष अमावस्या है। इस अमावस्या को पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहा जाता है। पितृ विसर्जन पर अपनी श्रद्धा के अनुसार कुछ ना कुछ दान जरूर करना चाहिए। यह माना जाता है की इस दिन दान करने से हमारी जिंदगी के संकट दूर होते हैं। ऐसा माना जाता है की अगर हम पूरे पितृ पक्ष में पितरों के लिए कुछ ना भी करें तो केवल अमावस्या के दिन भी दान पुण्य कर और निर्धनों को भोजन करा कर भी पितरों को शान्ति मिल सकती है।

अगर पूर्वजों की देहावसान तिथि पता ना हो तो पितृ विसर्जन अमावस्या को उनका श्राद्ध कर सकते हैं। हिन्दु अपने सभी पूर्वजों को पितृ मानते हैं और सभी पूर्वजों की देहावसान तिथि ज्ञात नहीं होती है, इसलिए सभी अज्ञात पूर्वजों का पितृ, पितृ विसर्जन अमावस्या को किया जाता है। माना जाता है की इस दिन राहु से सम्बंधित सभी बाधाओं को दूर किया जा सकता है। इस दिन किसी विद्वान एवं सात्विक ब्राह्मण को घर पर आमंत्रित कर भोजन का आग्रह किया जाता है तथा उसका आशीर्वाद लिया जाता है।

पितृ अमावस्या पर नहा कर स्वच्छता से और अच्छे मन से भोजन बनाना चाहिए। ब्राह्मण को बुलाकर भोजन कराना चाहिए, ब्राह्मण के भोजन से पूर्व हवन कराना चाहिए। श्राद्ध और ब्राह्मण को भोजन मध्यान्ह के समय होना चाहिए। श्रद्धा पूर्वक ब्राह्मण को भोजन करा कर, उसका तिलक कर के, उसे दक्षिणा देकर विदा करना चाहिए और फिर सभी घर के सदस्यों ने एक साथ भोजन करना चाहिए और पितरों की शांति की प्रार्थना करनी चाहिए।

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