…तो इस कारण भज्जी टीम मीटिंग में करते थे पंजाबी में बात, हुआ बड़ा खुलासा

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ले पंगा न्यूज डेस्क, चंदना पुरोहित। 90 की दशक में अनिल कुंबले ने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान और आयाम दिए। वैसे तो भारतीय क्रिकेट में बड़े बड़े स्पिनर हो चुके हैं लेकिन अनिल कुंबले के बाद हरभजन सिंह ने स्पिन गेंदबाजी में अपनी पहचान बनाई। हरभजन सिंह ने 1998 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना पहला डेब्यू किया था। इस सीरीज को भारत ने 2-0 से जीता था। भज्जी ने अपनी डेब्यू की पहली पारी में 2 विकेट अपने नाम किए थे। इसके बाद उन्होंने टीम इंडिया के लिए जबरदस्त प्रदर्शन किया। उन्होंने भारत के लिए कुल 103 मैच खेले, जिसमें उन्होंने 417 विकेट गवाए और 236 वनडे खेले जिसमे 269 विकेट अपने नाम किए।

भारतीय क्रिकेट टीम का अहम हिस्सा रहे भज्जी ने अपने डेब्यू से 20 साल बाद अपने डेब्यू से जुड़ा एक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया की कैसे अपने डेब्यू के वक़्त उन्हें अंग्रेजी बोलना नहीं आता था और वह टीम मीटिंग की बाते समझ नहीं पाते थे। उन्होंने बताया की उस वक़्त टीम के कप्तान अजरुद्दीन ने उनकी मदद की।

उन्होंने बताया की उनके डेब्यू से पहले खिलाडी ड्रेसिंग रूम में टीम मीटिंग के दौरान अंग्रेजी में बात कर रहे थे और वह उनकी बात पूरी तरह समझ नहीं पा रहे थे, क्योंकि उस वक़्त उन्हें अंग्रेजी नहीं आती थी। टीम मीटिंग के दौरान जब उन्हें भी कुछ बोलने के लिए कहा गया तब उन्हे कहना पड़ा की उन्हें अंग्रेजी नहीं आती है। उसके बाद अजरुद्दीन ने उन्हें आकर पूछा की उन्हें क्या समस्या है तब उन्होंने अजरुद्दीन से कहा की में अंग्रेजी नहीं बोल पाता हुं तब अजरुद्दीन ने उनसे पूछा था की फिर वह कौनसी भाषा जानते हैं? तब भज्जी ने उन्हें बताया की उन्हें पंजाबी आती है। तब अजरुद्दीन ने उन्हें टीम मीटिंग में पंजाबी में अपनी बात रखने के लिए कहा था।

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