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त्रिशंकु लोकसभा होने पर यह नेता होंगे किंगमेकर

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज डेस्क, अशोक योगी। कल शाम को लोकसभा चुनाव 2019 के छठे चरण का प्रचार थम गया। लोकसभा चुनाव के तहत अबतक पांच चरणों के मतदान समाप्त हो गए। सियासी जानकार कहना है कि किसी इन चुनावों में किसी पार्टी को अपने दम पर बहुमत नहीं मिलने वाला। अगर ये भविष्यवाणी सच साबित होती है तो केंद्र में सरकार के गठन को लेकर देश के तीन अलग- अलग राज्यों के तीन बड़े नेता किंगमेकर साबित हो सकते हैं। दल यूपीए या एनडीए के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ रहे उनके तेवर देखकर भी अनुमान लगाया जा सकता है कि वे चुनाव नतीजे आने और त्रिशंकु लोकसभा होने पर किस पाले में जाएंगे और किस में नहीं। मगर, बात करें ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक, तेलंगाना के सीएम व टीआरएस प्रमुख केसीआर और वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी की तो इन नेताओं ने अपने इरादे जाहिर नहीं किए हैं। ऐसे में इन दलों की तिकड़ी पर ही सबकी निगाहें होंगी।

बीजेडी के नवीन पटनायक

नवीन पटनायक की बीजेडी ओडिशा में अकेले चुनाव मैदान में है, यहां बीजेडी का मुकाबला सीधा बीजेपी और कांग्रेस दोनों से होगा। बीजेडी ने बीजेपी से भी उतनी ही दूरी बनाए रखी जितनी वो कांग्रेस से रखती रही है। सियासी जानकारों का कहना है कि इस बार ओडिशा में बीजेडी के खिलाफ जिस मजबूती से बीजेपी चुनाव लड़ रही है। जिससे लग रहा है कि पटनायक कांग्रेस और बीजेपी से बराबर दूरी बनाए रखने की नीति पर कायम रख सकते हैं। इसके बावजूद जिस पार्टी की केंद्र में सरकार बनने की संभावना होगी और उस पार्टी के साथ खड़े नजर आना उनके लिए ज्यादा फायदेमंद होगा।

टीआरएस से के चंद्रशेखर राव

के चंद्रशेखर राव की पार्टी टीआरएस तेलंगाना में अकेले चुनावी मैदान में है, जिसका बीजेपी और कांग्रेस से सीधा टक्कर है। पांच चरण की वोटिंग के बाद केसीआर गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेसी सरकार के गठन की कवायद में जुट गए हैं। उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री और माकपा नेता पिनरई विजयन से मुलाकात करके राजनीतिक हालात पर चर्चा की है। विधानसभा चुनाव के नतीजे देखकर लगता है कि तेलंगाना की लोकसभा सीटों पर केसीआर का जादू सिर चढ़कर बोल सकता है। अगर किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलता है तो केसीआर खुला विकल्प रखेंगे।

वाईएसआर कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी

आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी और जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस के बीच रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा। सूबे में दोनों पार्टियां बिना किसी गठबंधन के चुनाव मैदान में उतरी थीं। हालांकि कांग्रेस और बीजेपी भी यहां चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन मुख्य लड़ाई जगन रेड्डी और नायडू के बीच बताई जा रही है। एनडीए से अलग होने के बाद चंद्रबाबू नायडू लगातार मोदी के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट करने का बीड़ा उठाए हुए हैं। जगन मोहन रेड्डी की टीडीपी से राजनीतिक लड़ाई है। हालांकि जगन ने साफ कह दिया है कि जो भी पार्टी आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देगी, उसे वो समर्थन करेंगे।

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