देवशयनी एकादशी: सूर्यास्त के बाद तुलसी के समक्ष ​दीपक जलाकर करें इस मंत्र का जाप, नहीं होगी कभी धन की कमी

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ले पंगा न्यूज डेस्क, धीरज सैन। आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इस एकादशी को पद्मनाभा, आषाढ़ी, हरिशयनी और देवशयनी एकादशी भी कहा जाता है। बता दें कि सभी व्रतों में से श्रेष्ठ व्रत एकादशी का है। मान्यता है कि इस तिथि से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु शयन करते हैं।


एकादशी की रात में जो भी व्यक्ति सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करता है। उसको जल्द ही सभी कष्टों से मुक्ति मिल जात है। बता दें कि श्रीकृष्ण को तुलसी बहुत प्रिय है। उनकी पूजा में तुलसी का बहुत महत्व है। शास्त्रों में तुलसी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। एकादशी के दिन संध्या के समय तुलसी के आगे घी का दीपक जला कर इस मंत्र के साथ “ऊँ श्री तुलस्यै विद्महे। विष्णु प्रियायै धीमहि। तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।।” पूजा करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है और सभी प्रकार की परेशानियों से छुटकारा मिलता है।

एकादशी के दिन कुछ बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए। इस दिन भूलकर भी मांस, दारू का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही स्त्री प्रसंग से भी दूर रहना चाहिए। एकादशी व्रत में चावल, अन्न आदि का भी निषेध होता है।

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