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देश में बड़ी पार्टी होना ही काफी नहीं है उसके साथ दिल भी है जरुरी : सचिन पायलट

राजनीति,

ले पंगा न्यूज डेस्क, अशोक योगी। लोकसभा चुनाव में देश की तमाम पार्टी एक- दूसरे पर जमकर वार कर रही थी जोकि अब जारी है। भले ही राजस्थान में लोकसभा चुनाव सम्पन्न हो गए है। लेकिन राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने मोदी सरकार और भाजपा पर जमकर हमला बोला है। पायलट ने कहा कि प्रज्ञा ठाकुर ने पहले हेमंत करकरे पर कहा था कि वो मेरे श्राप के कारण मरा है। फिर सारी हदें पार कर प्रज्ञा ने गोडसे की प्रशंसा करने वाले बयान दी। जोकि बीजेपी को शोभा नहीं देता है। भाजपा अपने आप को इतनी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी बोतली है। इतना भी उनमें कलेजा नहीं है। प्रियंका जी कहती है कि 56 इंच की छाती है पर दिल नहीं है। दिल नहीं है जब ही तो वो अपनों को कठघरे में खड़ा करने की हिम्मत नहीं होती है।

भाजपा ने नहीं रोका प्रज्ञा को

पायलट ने प्रज्ञा पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के राष्ट्रपिता उनकी हत्या के 70 साल बाद भी अगर कोई भाजपा का नेता या उम्मीदवार उनको देश भक्त बोलती हैं। तो अपने आप में चौकाने वाला स्टेटमेंट हैं। मुझे आश्चर्य इस बात का हुआ। कि भोपाल भाजपा की प्रत्याक्षी प्रज्ञा ठाकुर ने गोडसे की प्रशंसा की। जिस व्यक्ति ने इस देश के राष्ट्रपिता की हत्या की। ऐसे व्यक्ति को राष्ट्रभक्त बताने का दुस्साहस किया है। ऐसे लोगों को किसी भी भाजपा के बड़े नेता ने न रोका न टोका ना ही बयान का खंडन किया। ना उनको पार्टी से बर्खास्त करने की बात कही। सिर्फ पार्टी उनके बयान से अलग हो जाए ये न काफी है।

बीजेपी में मची खलबली

पायलट ने लोकसभा चुनाव को लेकर कहा कि छह चरणों का अब तक जो फीडबैक आया है। उसमें भाजपा हर चरण में पिछड़ रही है। क्योंकि लगातार प्रधानमंत्री, अमित शाह और भाजपा नेताओं के जो बयान आ रहे हैं। उससे अंदाजा लग सकता है कि बौखलाहट उनके अंदर जगह बना चुकी है। दो दिन पहले में कोलकत्ता में था। वहां पर जो घटनाक्रम हुआ है। वो भी दिखाता है भाजपा जिन राज्यों में अधिक संख्या में जीतकर गई थी। मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात इन सभी राज्यों में भारी नुकसान उन्हे हो रहा है। उत्तरप्रदेश में भी भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। इसलिए अपनी जगह तलाशने के लिए एक डेस्परेट अटैंपट उन्होंने बंगाल में किया है।

चुनाव आयोग पर लगाया आरोप

सचिन ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग की ओर से जिस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं, उससे स्पष्ट हो गया है कि आयोग की निष्पक्षता संदिग्ध हो गई। मैं पहली बार आयोग के निष्पक्षता पर सवाल खड़ा कर रहा हूं।  अमित शाह के रोड शो में जो हिंसा हुई उसके प्रमाण सब के पास हैं। कॉलेज कैंपस में विद्यासागर जी की मूर्ती को जिन लोगों ने तोड़ा है। उसकी भी जांच हो सकती है। लेकिन जांच के आदेश नहीं आना निंदनीय है। अशोभनिय है। इस घटना के बाद प्रधानमंत्री का जो बयान आया। एक प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी बनती है कि कहीं पर कोई भी हिंसा करे उसे खासकर चुनाव के दौरान तो उस घटना की पूरी तरह निंदा होनी चाहिए। बजाय इसके उन्होंने जो तुलना की है। ममता बनर्जी उनकी पार्टी और नेताओं की। कश्मीर के पत्थरबाजों से जो तुलना की। उन्होंने इस पूरी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण नहीं बताया। आप अंदाजा लगा सकते हैं। इतने बड़े पद पर आसीन लोग। देश के प्रधानमंत्री वो उन लोगों को जो भारत की सैनाओं पर पत्थर फेंकते हैं। जो अलगाववाद की बातें करते हैं। उनकी एक सीएम से तुलना कर रहे हैं।

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