दो दिन में वन्य विभाग नहीं पकड़ पाया तेंदुआ, झालाना में दहशत का माहौल

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ले पंगा न्यूज डेस्क, चंदना पुरोहित। वन क्षेत्र पर इंसानी कब्ज़ा यह वन्य जीव के लिए बडी समस्या तो है ही वहीं पर्यावरण संतुलन की दृष्टि से यह घातक है। हम वन्य जीव संवर्धन पर काम कर रहे हैं पर हमारे प्रयास नाकाफी हैं। जानवर आबादी क्षेत्र में आ जाते हैं और इंसान के जान को खतरा हो जाता है। शनिवार को एक मादा तेंदुए को झालाना सांस्थानिक क्षेत्र में ललित अकादमी में देखा गया। वन विभाग की खोज अब भी जारी है परन्तु अब भी तेंदुए की खोज नहीं हो पाई है।

झालाना वन क्षेत्र में प्रोजेक्ट लेपर्ड की शुरुआत की गई थी। जिसका उद्देश्य तेंदुए का संवर्धन करना था। जिसमे तेंदुए के लिए भोजन की व्यवस्था करना सबसे महत्वपूर्ण काम था। झालाना में वर्तमान में 25 तेंदुए हैं। लगातार यह तेंदुए आबादी क्षेत्र में देखे जाते हैं। झालाना क्षेत्र में तेंदुए को देखे जाने के बाद कर्पूरचंद कुलिश वन कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया है। तेंदुए को पकड़ने के लिए स्मृति वन में कैमरे लगाए गए हैं और पिंजरा भी लगाया गया है।

प्रोजेक्ट लेपर्ड पर सरकार 7 करोड़ का बजट दे चुकी है जिसमे से 5 करोड़ रूपए खर्च हो चुके हैं। यह अधिकतम पैसा झालाना वन क्षेत्र में हुआ है, इसके बावजूद इनके भोजन के किए 2000 नीलगाय हैं। तेंदुए के लिए भोजन सामग्री बढ़ने का काम बंद है। वन विभाग का पूरा जोर सिर्फ दीवारें बढ़ाने और कैमरा लगाने पर है। वन विभाग का कहना है की वह कैमरा के जरिए वन्य जीवों पर निगरानी रखता है परन्तु तेंदुए कैमरा में ट्रेप नहीं होते इसलिए उनके हलचल का पता नहीं लग पता। तेंदुए को झालाना में देखे जाने के बाद झालाना में दहशत का माहौल है।

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#JhalanaInstitutionalArea #leopard

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