धुलंड़ी पर कही शक्ति प्रदर्शन तो कहीं पुरुषों की होती है पिटाई

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ले पंगा न्यूज डेस्क, प्रीति दादूपंथी। भारत को विविधताओं का देश कहा जाता है। यहां स्थान बदलने के साथ ही बोली, परंपराएं व रहन-सहन का तरीका भी बदल जाता है। रंगों के त्योहार ‘होली’ जैसी मस्ती शायद ही किसी और त्योहार में देखने को मिलती हो। देशभर में होली की तैयारी त्योहार की तारीख से एक महीना पहले ही शुरू हो जाती है और देश के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग-अलग ढंग से मनाया जाता है। आज हम आपको देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग तरह से मनाई जाने वाली होली के बारे में बताएंगे।

आनन्दपुर साहिब में होता है शक्ति प्रदर्शन

anandpur sahib

सिक्खों के पवित्र धर्मस्थान श्री आनन्दपुर साहिब में होली के अगले दिन से लगने वाले मेले को होला मोहल्ला कहते है। ये उत्सव 6 दिन तक चलता है। इस अवसर पर भांग की तरंग में मस्त घोड़ों पर सवार निहंग, हाथ में निशान साहब उठाए तलवारों के करतब दिखा कर साहस, पौरुष और उल्लास का प्रदर्शन करते हैं।

बंगाल में निकलती है दोल जात्रा

बंगाल में होली का स्वरूप पूर्णतया धार्मिक होता है। होली के एक दिन पहले यहां दोल जात्रा निकाली जाती है। इस दिन महिलाएं लाल किनारी वाली पारंपरिक सफेद साड़ी पहन कर शंख बजाते हुए राधा-कृष्ण की पूजा करती है और प्रभात-फेरी (सुबह निकलने वाला जुलूस) का आयोजन करती है। इसमें गाजे-बाजे के साथ, कीर्तन और गीत गाए जाते हैं।

होली पर कीचड़ का होता है इस्तेमाल

भोजपुरी होली बड़े ही जोश के साथ मनाई जाती है और यहां होली पर सिर्फ रंगों का ही नहीं बल्कि कीचड़ का भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा होली की खुशी में यहां के लोग इस दिन जमकर भांग भी चढ़ाते है। ढोल-नगाड़ों और होली स्पेशल गानों की धुनों पर लोग दिल खोलकर डांस करते है।

होली पर पुरुषों को डंडे से पीटा जाता है

बरसाना की लट्‌ठमार होली देश में ही नहीं विदेश में भी प्रसिद्ध है। ये होली फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है। इस दिन नंद गांव के लोग होली खेलने के लिए राधा के गांव बरसाने जाते है और बरसाना गांव के लोग नंदगांव में जाते हैं। इन पुरूषों को होरियारे कहा जाता है। जब नाचते, झूमते लोग गांव में पहुंचते हैं तो औरतें हाथ में ली हुई लाठियों से उन्हें पीटना शुरू कर देती है और इस दौरान पुरुष खुद को बचाते है। खास बात यह है कि यह सब हंसी-खुशी के वातावरण में होता है।

मंदिरों में प्राकृतिक रंगों से खेलते हैं होली

ब्रज में होली बसंत पंचमी से चैत्र कृष्ण पंचमी तक मनाई जाती है। ब्रज की होली देशभर में प्रसिद्ध है। ब्रज में खेली जाने वाली होली में भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य होली की झलक हमें मिलती है। यही कारण है कि इसे देखने के लिए हर साल हजारों लोग ब्रज मंडल में इकट्‌ठा होते हैं। ब्रज की होली में प्रेम और भक्ति के रंग चारों तरफ बिखरे दिखाई देते हैं। ब्रज में खेली जाने वाली होली में प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है।

गीत-संगीत के साथ छत्तीसगढ़ में होरी

छत्तीसगढ़ में होली को होरी के नाम से जाना जाता है। गांव के चौक-चौपाल में फाग के गीत होली के दिन सुबह से देर शाम तक निरंतर चलते है। रंग भरी पिचकारियों से बरसते रंगों एवं उड़ते गुलाल में मदमस्त स्थानीय निवासी फागुन महाराज को अगले वर्ष फिर से आने की न्यौता देते हैं।

गोवा में ऐसे मनाते हैं होली

गोवा के निवासी होली को कोंकणी में शिमगो या शिमगोत्सव कहते हैं। वे इस अवसर पर बसंत का स्वागत करने के लिए रंग खेलते है। इसके बाद खाने में मुर्ग या मटन की तीखी करी खाते है, जिसे शगोटी कहा जाता है। मिठाई भी खाई जाती है।

होली पर सजती हैं महफिलें, गाए जाते हैं गीत

उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल की सरोवर नगरी नैनीताल और अल्मोड़ा जिले में होली के अवसर पर गीत बैठकी का आयोजन किया जाता है। इसमें होली के गीत गाए जाते हैं। यहां होली से काफी पहले ही मस्ती और रंग छाने लगता है। इस रंग में सिर्फ अबीर-गुलाल का टीका ही नहीं होता बल्कि बैठकी होली और खड़ी होली गायन की शास्त्रीय परंपरा भी शामिल होती है।

भाभी-देवर की होली

हरियाणा में जिस तरह की होली खेली जाती है वो जरा लीक से हटकर है। यहां खेली जाने वाली होली को भाभी-देवर होली भी कहा जाता है। आपको बता दें कि दही हांडी के अलावा, हरियाणा में खेली जाने वाली भाभी-देवर होली भी देशभर में लोकप्रिय है।

इंडियन टोमाटिना

असम के गुवाहाटी में होली खेलने का अंदाज स्पेन जैसा है। यहां लोग टमाटरों के साथ होली खेलते है और खूब मौज मस्ती करते है।

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