Chaitra Navratri

नवरात्रि के 9 दिन में इस प्रकार करें मां के स्वरूपों की पूजा

धर्म,

ले पंगा न्यूज डेस्क अशोक योगी। नवरात्रि के पर्व पर देवी के नौ शक्ति रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस साल चैत्र नवरात्र शनिवार से आरम्भ हो रहे है। इन नौ दिनों मां नौ रुपों की पूजा शुभ और लाभदायक मानी जाती है। इस नवरात्र में पांच सर्वार्थ सिद्धि, दो रवि योग और रवि पुष्य योग का संयोग बन रहा है।

कलश स्थापना के समय ये सामग्री है आवश्यक

मिट्टी का कटोरा, जौ, साफ मिट्टी, कलश, रक्षा सूत्र, लौंग इलाइची, रोली और कपूर। आम के पत्ते, पान के पत्ते, साबुत सुपारी, अक्षत, नारियल, फूल, फल।

देवियों की इस प्रकार से करें पूजा

पहला नवरात्र 6 अप्रैल शनिवार को : घट स्थापन व मां शैलपुत्री पूजा, मां ब्रह्मचारिणी पूजा
दूसरा नवरात्र 7 अप्रैल रविवार को : मां चंद्रघंटा पूजा
तीसरा नवरात्र 8 अप्रैल सोमवार को : मां कुष्मांडा पूजा
चौथा नवरात्र 9 अप्रैल मंगलवार को : मां स्कंदमाता पूजा
पांचवां नवरात्र 10 अप्रैल बुधवार को : पंचमी तिथि सरस्वती आह्वाहन
छष्ठ नवरात्र 11 अप्रैल वीरवार को: मां कात्यायनी पूजा
सातवां नवरात्र 12 अप्रैल शनिवार को: मां कालरात्रि पूजा
नवमी 14 अप्रैल रविवार को : मां महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी, महानवमी

मां के श्रृंगार में यह सामान है जरुरी

माता के श्रृंगार के लिए लाल चुनरी के साथ लाल चूड़ियां, सिंदूर, कुमकुम, मेहंदी, आलता और बिंदी आदि सामान जरुरी होता है। पूजा प्रसाद के रुप में फूलदाना, मिठाई, मेवा, फल, के साथ ही आप इलायची, मखाना, लौंग, मिस्री आदि ले सकते है। हवन के लिए हवन कुंड, रोजाना लौंग के 9 जोड़े, कपूर, सुपारी, गुग्गुल, लोबान, घी, पांच मेवा, चावल आदि जरुरत होती है। नौ दिन अखंड ज्योति अगर आप जला रहे तो आप शुद्ध घी, मिटी का बड़ा दिया, बाती या पीतल की अंखड ज्योति की जरुरत पड़ेगी। नवरात्र की समाप्त के बाद कन्याओं के लिए वस्त्र, प्लेट, उपहार सामग्री प्रयोग कर सकते है।


शुभ मुहूर्त में किया जाए घट स्थापना

इस साल 6 अप्रैल शनिवार से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन अभिजीत मुहूर्त में 6 बजकर 9 मिनट से लेकर 10 बजकर 19 मिनट के बीच घट स्थापना करना बेहद शुभ होगा।

चैत्र नवरात्र से होता है हिंदू नववर्ष का प्रारंभ

शास्त्रों के अनुसार चैत्र नवरात्र से हिंदू नववर्ष का प्रारंभ भी माना जाता है। पुराणों के मुताबिक चैत्र नवरात्रि से पहले मां दुर्गा का अवतरण हुआ था, वही ब्रह्म पुराण में कहा गया है कि देवी ने ही ब्रह्माजी को सृष्टि निर्माण करने के लिए कहा। इन्ही नवरात्रों के तीसरे दिन भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार हुआ था, और श्रीराम अवतार भी चैत्र नवरात्र में ही हुआ था।

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