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निर्वाचन आयोग की अवैध धन पर खुफिया निगाह

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज डेस्क, प्रीति दादूपंथी। लोकसभा चुनाव के तारीख की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। निर्वाचन आयोग के साथ वित्तीय प्रबंधन एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक के दौरान देशभर में कम से कम 150 ऐसे लोकसभा क्षेत्र चिन्हित किए गए, जिनमें चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा अवैध धन जब्त किया जाता है। हालांकि जितना अवैध धन जब्त किया जाता है, उससे कहीं ज्यादा चुनाव के दौरान इस्तेमाल हो जाता है। आपको बता दें कि निर्वाचन आयोग की खुफिया निगाह इस बार के लोकसभा चुनाव के लिए चप्पे-चप्पे पर रहेगी। चुनाव आयोग इसके लिए स्पेशल ऑब्जर्वर की टीम भी इन इलाकों में तैनात करेगा।

सूचनाओं का आदान-प्रदान हो

शुक्रवार को निर्वाचन आयोग के चुनावी खर्च निगरानी विभाग के साथ सीबीडीटी, आयकर विभाग, आर्थिक खुफिया विभाग, अर्धसैनिक बलों के प्रमुख सहित आर्थिक अपराध शाखा जैसे कई वित्तीय प्रबंधन संस्थानों के प्रमुखों के साथ मिलकर बैठक हुई। इस बैठक में इस विषय पर चर्चा भी हुई कि एक-दूसरे से खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान वक्त पर रहे और उस पर मिलजुल कर फौरन और सटीक कार्रवाई हो। जिससे चुनाव में काले धन के उपयोग को न केवल रोका जा सकता है, बल्कि ऐसा करने वालों में मन में कानून का डर भी बैठेगा। इस बैठक के दौरान यह भी तय किया गया कि सभी विभाग चुनावी प्रक्रिया खत्म होने तक सप्ताह के सातों दिन और 24 घंटे इस अभियान में जुटे रहेंगे।

एप के जरिए अभियान चलाया जा रहा

आयोग में हुई बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि तमिलनाडु की सभी सीटें अवैध धन के इस्तेमाल के संवेदनशील इलाके हैं। इसके अलावा आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, बिहार, झारखंड और गुजरात में गत चुनावों में बड़ी मात्रा में अवैध धन, शराब और ड्रग्स की खेप पकड़ी गई थी। आंध्रप्रदेश में तो 175 में से 110 विधानसभा हलके अवैध धन के मामले में न केवल संवेदनशील हैं बल्कि बदनाम भी है। लिहाजा इन राज्यों में आयोग सिटीजन विजिल यानी सी विजिल मोबाइल एप के जरिए लोगों को जागरूक रखने का अभियान चला रहा है, जिससे लोग इस बारे में सजग और सतर्क रहें। आयोग का कहना है कि एप के जरिए जानकारी देने वाले नागरिकों के नाम और पहचान गुप्त रखी जाएगी। अपराधियों की जानकारी सार्वजनिक जरूर होगी। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला के अनुसाप अब तक तो निर्वाचन आयोग को चुनाव में काले धन के उपयोग को रोकने में ज्यादा सफलता हाथ नहीं लगी है, लेकिन ऐसे उपायों से कुछ कमी तो जरूर आएगी।

काले धन पर नजर

इस बैठक में एक एक्शन का रोडमैप भी तैयार किया गया है। गत चुनावों में मिले अनुभव के अनुसार काले धन के परिवहन की पारंपरिक तरीकों के अलावा आधुनिक तकनीक से रुपए के लेन-देन पर नजर रखने के अत्याधुनिक तरीकों पर भी चर्चा हुई। चुनावी हलचल के दौरान सिर्फ धन ही नहीं बल्कि शराब, नकली नोट, ड्रग्स आदि की भी तस्करी इन दिनों बढ़ जाती है, इस पर निगाह रखी जाएगी। इन सबको रोकने के लिए अंतरराज्यीय सीमाओं के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और सामुद्रिक सीमाओं पर भी चौकसी बढ़ाई जा रही है।

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