पानी जो पाकिस्तान जाता है, उसे मोड़कर यमुना में लाया जाएगा

न्यूज़ गैलरी,

देर आये दुरूस्त आये, केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने आज कहा कि,सरकार ने पूववर्ती नदियों के पानी को डायवर्ट करने का फैसला किया है,हमारी नदियों का जो पानी अभी तक पाकिस्तान की ओर जाता था,उसकी सप्लाई बन्द करके,जम्मू कश्मीर और पंजाब में कि जायेगी, गौर तलब है कि,गडकरी आज बागपत में यमुना के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का शिलान्यास करने आये थे,इस मौके पर उन्होंने कहा की रावी नदी पर शाहपुर -कुन्डी में बांध का निर्माण शुरू हो गया है,इसके अलावा यूजेएच परियोजना जम्मूकश्मीर में उपयोग के लिये जल इकट्ठा करेगी,और शेष पानी ,दूसरे बेसिन राज्यों को पानी प्रदान करने के लिये सेकेन्ड रावी बेस से प्रवाहित होगा।

पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने भारत से जाने वाला पानी रोकने की मांग लगातार उठ रही है. इस बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भारत के अधिकार वाली तीनों नदियों का पानी पाकिस्तान के बजाय यमुना में लाने की बात कही है. उनकी इस घोषणा ने पाकिस्तान से बदले को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

दरअसल, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बागपत में यमुना के वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट का शिलान्यास करने पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जाने वाली तीन नदियों के पानी को यमुना में लाया जाएगा. इसके लिए तीन प्रोजेक्ट तैयार किए जा चुके हैं.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिल्ली -आगरा से इटावा तक जलमार्ग की डीपीआर तैयार हो चूका है. इसके प्रोजेक्ट के तहत बागपत में रिवर पोर्ट बनाया जाएगा. किसानों को होने वाली पानी की समस्या दूर होगी और कई किस्म की फसलें किसान तैयार कर सकेंगे. गन्ने की खेती और चीनी मिलों को भी इससे फायदा होगा.

गडकरी ने कहा कि हम जलमार्ग पर भी काम कर रहे हैं. पानी की कमी न रहे इसलिए भारत के अधिकार वाली तीनों नदियों का पानी जो पाकिस्तान जाता है, उसे मोड़कर यमुना में लाया जाएगा. इससे हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोग दिल्ली से आगरा जलमार्ग से जा सकेंगे.

मालूम हो कि बागपत में यमुना किनारे रिवर पोर्ट भी तैयार किया जा रहा है. पोर्ट से चीनी बांग्लादेश और म्यांमार तक भेजी जा सकेगी. इससे खर्च भी कम होगा.

पाकिस्तान जाने वाले पानी को रोकने के लिए सिंधु जल समझौता बाधा बन सकता है. क्योंकि भारत के अधिकारी में आने वाली तीन नदियों का पानी सिंधु जल समझौते के तहत रोका नहीं जा सकता. पहले हुए भारत पाक युद्धों के दौरान भी यह समझौता प्रभावी रहा था

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