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पाली संसदीय सीट पर कांग्रेस और बीजेपी में है रोचक मुकाबला

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज डेस्क। राजस्थान का पाली जिला पूर्व में अरावली पर्वत श्रृंखला, उत्तर में नागौर और पश्चिम जालौर जिले से लगा हुआ है। पाली संसदीय सीट पर पिछले ढाई दशक से बीजेपी ने यहां अपना वर्चस्व कायम किया है, लेकिन कुछ समय पहले यहां पर कांग्रेस का दबदबा हुआ करता था। पूरे देश में आगामी लोकसभा चुनावों की सुगबुगाहट तेज होने के साथ ही तमाम राजनीतिक दल सियासी खेमेबंदी की पांबदी में लग गए हैं। राजस्थान में भी विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनावों के लिए दोनों बड़े दल कांग्रेस और बीजेपी ने अपनी- अपनी कमर कस ली है।

ऐसे में मिशन 2019 के 25 सीटों का लेकर दोनों राजनीतिक दलों के बीच इस बार का मुकाबला रोचक होने वाला है। राजस्थान में अब तक राजनीतिक ट्रेंड रहा है कि राज्य में सरकार बनाने वाली पार्टी का लोकसभा चुनाव में पलड़ा भारी रहा है। अगर पाली लोकसभा क्षेत्र की बात करें, तो एक-दो वाकयों को छोड़कर मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही रहा है। वैसे तो आजादी के बाद से इस सीट पर कांग्रेस ने दबदबा बना रखा था लेकिन पिछले ढाई दशक से यह सीट बीजेपी के नाम हो गई है।

जोधपुर जिले की 3 और पाली जिले की 5 विधानसभा को मिलकर बना है पाली लोकसभा क्षेत्र में

पाली लोकसभा सीरवी, विश्नोई, राजपूत, जाट और अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र है। साल 2011 की जनगणना के मुताबकि यहां की आबादी 27,53,012 जिसका 81.34 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 18.66 प्रतिशत हिस्सा शहरी है। वहीं यहां की कुल आबादी का 19.89 फीसदी अनुसूचित जाति और 6.07 फीसदी अनुसूचित जनजाति हैं। जोधपुर जिला मारवाड़ की राजनीति का केंद्र माना जाता है, तो वही पाली जिला मारवाड़ का दिल कहा जाता है। जोधपुर की 3 और पाली जिले की 5 विधानसभा सीटों को मिलाकर पाली लोकसभा क्षेत्र का गठन किया गया है। पाली संसदीय सीट के अंतर्गत पाली जिले की 5- सोजात, पाली, मारवाड़ जंक्शन, बाली, सुमेरपुर विधानसभा और जोधपुर जिले की 3-ओसियां, भोपालगढ़ और बिलाड़ा विधानसभा शामिल हैं।

यह है अब तक की लोकसभा सीटों का गणित

आजादी के बाद पाली लोकसभा सीट पर हुए 16 लोकसभा और 1 उपचुनाव में से 8 बार कांग्रेस, 6 बार बीजेपी, 1 बार स्वतंत्र पार्टी, 1 बार भारतीय लोकदल और 1 बार निर्दलीय ने जीतकर यह सीट अपने नाम किया है। 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में निर्दलीय अजीत सिंह जीते। इसके बाद 1957 में कांग्रेस के हरीशचंद्र माथुर और 1962 में जसवंत राज मेहता ने जीत दर्ज की। 1967 में स्वतंत्र पाटी के सुरेंद्र कुमार तापड़िया जीते, तो 1971 में कांग्रेस के मूल चंद डागा ने बाजी मारी। 1977 की जनत लहर में भारतीय लोकदल के अमृत नहाटा ने कांग्रेस के डागा को शिकस्त दी। 1980 और 1984 के चुनाव में लगातार दो बार कांग्रेस के मूलचंद डागा ने इस सीट पर जीत का परचम लहराया। 1988 का लोकसभा उपचुनाव भी कांग्रेस ही जीती। साल 1989 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पहली बार जीत दिलाने वाले गुमानमल लोढ़ा 1996 तक लगातार 3 बार पाली के सांसद चुने गए। 1998 में कांग्रेस में मीठा लाल जैन ने लोढ़ा को हराया। लेकिन 1999 के चुनाव में बीजेपी के पुष्प जैन ने यह सीट कांग्रेस से छीन ली और लगातार दो बार यहां के सांसद बने। साल 2009 में कांग्रेस ने यहां पर बद्रीराम जाखड़ को खड़ा किया जिन्होंने पुष्प जैन को हराकर इस सीट पर कांग्रेस की वापसी कराई। लेकिन 2014 के मोदी लहर में कांग्रेस यह सीट बचाने में नाकाम रही। बीजेपी के केंद्रीय कानून राज्य मंत्री पीपी चौधरी यहां से सांसद बनें। अब यह देखना है कि पिछले विधानसभा चुनाव में यहां की सभी सीटों पर कब्जा जमाने वाली बीजेपी का इस बार भी अपना दबदबा बरकरार रख पाएगी क्या?

2014 के चुनाव पर एक नजर

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पाली संसदीय सीट पर 57.9 फीसदी मतदान हुआ था। जिसमें बीजेपी को 65.0 फीसदी और कांग्रेस को 28.5 फीसदी वोट मिले। बीजेपी ने इस लोकसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी मनाने वाले पीपी चौधरी को टिकट दिया। इस चुनाव में बीजेपी के पीपी चौधरी को 7,11,772 और कांग्रेस से मुन्नी देवी गोदारा को 3,12,733 वोट मिले। चौधरी ने कांग्रेस उम्मीदवार मुन्नी देवी गोदारा को 3,99,039 मतों के भारी अंतर से हराया है। दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनाव में यहां की 4 विधानसभा सीट पर बीजेपी, 2 पर कांग्रेस, 1 पर आरएलपी और 1 पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है।

यह गणित है वर्तमान सांसद की

पाली सांसद पीपी चौधरी का जन्म 12 जुलाई 1953 को जोधपुर में हुआ था। 65 वर्षीय चौधरी ने अपनी बीएससी और कानून की पढ़ाई राजस्थान की जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी जोधपुर से की। पीपी चौधरी सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। लोकसभा में अपनी सक्रियता की वजह से चौधरी बीजेपी की कोर कमेटी का हिस्सा बने। पीपी चौधरी के अनुभव को देखते हुए उन्हें लोकसभा में संयुक्त संसदीय समिति (ऑफिस ऑफ प्रॉफिट) और कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन का सदस्य बनने का मौका भी मिला। राजनीति में पहली बार कदम रखने वाले पाली सांसद पीपी चौधरी जुलाई 2016 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में विधि मंत्रालय में राज्यमंत्री पद से नवाजा गया।

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