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पीएम मोदी को भारी पड़ सकता है बनारस में विकास का दांव !

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज़ डेस्क, प्रियंका । आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पीएम मोदी देशभर में चुनावी रैलियों और शिलान्यास-लोकार्पण कार्यक्रमों में दे-दनादन जुटे हैं। लेकिन पीएम मोदी को बनारस में विकास का दांव बेहद भारी पड़ सकता है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपने संसदीय क्षेत्र काशी को कई योजनाओं की सौगात देते हुए अपने ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की नींव रखी। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कुछ ऐसा कहा कि वहा की जनता में उनके बोले हुए शब्दों से नाराजगी फैल गई। पीएम मोदी के संबोधन में उनके शब्दों से अहम् की बू साफ़ नजर आ रही थी।

पीएम मोदी के संबोधन के शब्दों से जताई गई आपत्ति

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की नींव रखने के कार्यक्रम में अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि वर्षों से बाबा विश्वनाथ बंधे हुए थे, सांस भी नहीं ले पा रहे थे, लेकिन आज इस काम से उन्हें मुक्ति मिलेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि जब मैं राजनीति में नहीं था, तब भी सोचता था कि यहां कुछ करना चाहिए, लेकिन यह मेरे नसीब में ही लिखा था कि मेरे हाथ से ये काम हुआ। उनके इस बयान से करोड़ों लोगों की आस्था को गहरी ठेस पहुंची है। सकटमोचन मंदिर के महंत विशंभरनाथ मिश्र ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि, ‘भगवान शंकर सबको मुक्त करने वाले हैं ऐसे में कोई उन्हें मुक्त करने की बात करे ये अनुचित है, इससे मैं बेहद आहत हूं। बनारस की जीती जागती संस्कृति को ढहा कर उस पर विकास की इमारत खड़ी की जा रही है। यह लाखों लोगों की आस्था से खिलवाड़ है।’

नये विकास के लिए 50 प्राचीन मंदिर व मठों सहित दो सौ से अधिक भवन धवस्त

बता दें कि पीएम मोदी द्वारा प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से पूर्व काशी को आधुनिक बनाने के चक्कर में काशी विश्वनाथ मंदिर के नवनिर्माण के लिए ललिता घाट से विश्वनाथ मंदिर तक दो सौ से अधिक भवनों को धवस्त कर दिया गया। इनमें लगभग 50 की संख्या में प्राचीन मंदिर व मठ शामिल हैं।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा कि उन्होंने 40 से अधिक प्राचीन मंदिर जिस पर लोगों का अतिक्रमण था उसे मुक्त कराया है। मंदिरो की तोड़फोड़ करने को लेकर मोदी की तुलना लोगों ने औरंगजेब जैसे क्रूर शासक से कर डाली। लोगों ने कहा कि इतने मंदिर तो औरंगजेब ने भी अपने शासनकाल में नहीं तोड़े थे, जितने तहलके मोदी शासन में हो रहे है। लोग भारत भर्मण को आते है तो यहाँ के देवी-देवताओँ के दर्शन करके यहाँ की सभ्यता-संस्कृति के महत्व का अन्य देशो में प्रचार करते है।

लोग जमकर कर रहे हैं विरोध, पूछ रहे पीएम से सवाल

आधुनिक बनाने के चक्कर में जिन मंदिरों, मठों और इमारतों को गिराया गया है, उनको लेकर स्थानीय लोगों में गुस्सा है। ऐसे में जनता का सवाल है कि प्रधानमंत्री बताएं कि, किसके कब्जे से मुक्त कराया है काशी को ? काशी में जो हुआ है वो अकल्प्य है। काशी को ‘मोक्ष घर’ कहा जाता है और जब घर को ही मिटा दिया जायगा तो लोग घर से बेघर हो जायगे। काशी विद्वत परिषद के संगठन महामंत्री दीपक मालवीय का कहना है कि बाबा विश्वनाथ का देश के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में विशेष महत्व है। वो पूरे विश्व के नाथ हैं, पूरे देश के लोग मुक्ति की प्राप्ति के लिए काशी आते हैं। तो इन्हें कौन मुक्त करेगा जो खुद लोगों को मुक्ति देते हैं, काशी मोक्ष का कारक है। बाबा विश्वनाथ के इर्द गिर्द सुंदरीकरण किया जा सकता है, सुविधाएं बढ़ाई जा सकती हैं लेकिन बाबा को मुक्त करने की बात कहना अनुचित है।

सरकार पुन: प्राण प्रतिष्ठित करवा दर्शन-पूजन की व्यवस्था करे – मालवीय

इसके साथ ही दीपक मालवीय ने यह भी कहा कि काशी विश्वनाथ का नवनिर्माण अपने अनुसार करना जबरदस्ती है, क्योंकि इन सभी देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। अब अगर सरकार सुंदरीकरण कर रही है तो इन्हें पुन: प्राण प्रतिष्ठित कराते हुए दर्शन-पूजन की उचित व्यवस्था करे, जिससे लोगों की आस्था भंग न हो। गौरतलब है कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की जद में आने वाले क्षेत्र को बनारस में पक्का महल कहा जाता है जो गंगा तट पर अस्सी से राजघाट तक फैला है। बनारस का यह इलाका खुद में कई संस्कृतियों को समेटे हुए है। यहाँ प्राचीन मंदिर से लोगों का गहरा नाता है, जिनके दर्शन करने पूरे देश से लोग आते हैं। अब यहां तोड़-फोड़ के बाद तस्वीर बदल चुकी है और लोग जमकर विरोध कर रहे हैं।

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