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पुलिस अधिकारी सुसाईड के बाद ममता सरकार निशाने पर

लोकसभा 2019,

कोलकाता । पिछले दिनों सीबीआई-कोलकाता पुलिस विवाद को लेकर चर्चा में रहने वाली कोलकाता पुलिस एक बार फिर चर्चा में है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गौरव दत्त के कथित सुसाईड के बाद सियासत में उफान आ गया है। इस मुद्दे पर भाजपा नेता मुकुल रॉय ने पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को घेरते हुए निशाना साधा है। रॉय ने सीएम ममता बनर्जी पर पुलिस अधिकारी को आत्महत्या के लिए उकसाने का सीधा आरोप लगाया है और उनकी जल्द गिरफ्तारी की मांग करते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच की बात कही है। रॉय का कहना है कि किसी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने आत्महत्या के बाद सरकार या किसी पार्टी के नेता को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, ये पश्चिम बंगाल के इतिहास में पहली बार हुआ है। साथ ही रॉय ने इस मामले में आईपीएस एसोसिएशन द्वारा हस्तक्षेप करने की भी मांग की है।

गौरव दत्त का सुसाईड नोट सोशल मीडिया पर वायरल

बता दें कि, 1986 बैच के आईपीएस अधिकारी गौरव दत्त गत मंगलवार को साल्ट लेक स्थित अपने घर में खून से लथपथ पाये गये थे। जब उनकी पत्नी वहां पहुंची तो उनकी हाथ की नसें कटी हुईं थी। तत्काल आईपीएस गौरव को अस्पताल ले जाने के बाद भी उनकी जान नहीं बच पाई थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनका सुसाईड नोट वायरल हुआ है। जिसमें आईपीएस गौरव द्वारा पश्चिमी बंगाल सीएम ममता बनर्जी पर उन्हें ‘कंपल्सरी वेटिंग’ पर डालने के साथ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया गया है। 31 दिसंबर 2018 को रिटायर हुए आईपीएस गौरव दत्त को उनका ड्यूज प्रदान नहीं किया गया था। सोशल मीडिया पर आईपीएस गौरव के सुसाईड नोट के वायरल होने के बाद सियासी गलियारों में राजनीति अपने उबाल पर पहुंच गई है और ममता सरकार को घेरा जा रहा है। हालांकि यह सुसाइड नोट सोशल मीडिया पर वायरल कैसे हुआ, इसका पता नहीं चल पाया है।

‘आचरण के खिलाफ व्यवहार’ करने के कारण 9 माह तक संस्पेंड

वहीं बता दें कि, वेस्ट बंगाल प्रदेश की ममता सरकार इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है। इसी बीच सूत्रों पर यकीन करें तो सुसाईड नोट में आईपीएस गौरव द्वारा रिटायरमेंट के बाद जिन ड्यूज की बात लिखी गई है, उनमें से कुछ भी बाकि नहीं है और गौरव के खिलाफ विभाग की अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी होने के कारण उनको ‘कंपल्सरी वेटिंग’ पर रखना बताया जा रहा है। गौरतलब है कि एक सिपाही की पत्नी द्वारा आरोप लगाया गया था कि अधिकारी गौरव दत्त की यौन इच्छाएं पूरी नहीं करने पर उनके पति को प्रताड़ित किया गया था। इसके बाद फरवरी 2010 में ‘आचरण के खिलाफ व्यवहार’ करने को लेकर उन्हें विभाग ने 9 माह के लिए संस्पेड कर दिया था। गौरव दत्त को साल 2012 में भी एक बार फिर वित्तीय गड़बड़ी को लेकर विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

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