पूर्वी यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी होने से नहीं हो सकता सपा-बसपा के साथ कांग्रेस का गठबंधन

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज डेस्क अशोक योगी। कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनने के बाद प्रियंका गांधी शनिवार को दूसरी बार लखनऊ जाएगी। प्रियंका गांधी की सक्रियता और ज़मीनी स्तर की तैयारियों से साफ़ दिखाई दे रहा है कि सपा-बसपा गठबंधन का जूनियर पार्टनर बन कर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के उतरने की संभावनाएँ समाप्त होती जा रही है। कांग्रेस की सूची में बदायूँ से सलीम इक़बाल शेरवानी को टिकट दिया गया है। वही से सपा मुखिया अखिलेश के भाई धर्मेंद्र यादव वर्तमान में सांसद हैं। सपा के लिए एक और मजबूत सीट मानी जा रही मुरादाबाद से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर को उतारने के संकेत मिल रहे है सपा के नेताओं का कहना है कि महज 38 सीटों पर चुनाव लड़ने से उपजे बड़े पैमाने पर असंतोष को देखते हुए अब कांग्रेस के लिए कुछ सीट छोड़े जाने की गुंजाइश नही बची है। कांग्रेस की ओर से जारी प्रत्याशियों की ताजा सूची ने इसे और पुख़्ता हो गया है। बीएसपी सुप्रीमो मायावती शुरु से ही कांग्रेस को गठबंधन में शामिल होने के विरोध में है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि सपा-बसपा-रालोद गठबंधन में अपमानजनक तरीके से बेहद कम सीटों के साथ जाने का फ़ायदा नही है।

सपा-बसपा के कई बाग़ी कांग्रेस में हो सकते है शामिल

दो दिनों के इस दौरे में प्रियंका के साथ सपा-बसपा के कई बाग़ियों को कांग्रेस में शामिल होने की संभावना बताई जा रही है। प्रियंका उत्तर प्रदेश के इस दौरे में कई जातीय संगठनों के नेताओं के भी मुलाक़ात कर सकती हैं। प्रियंका की टीम के सदस्य सपा-बसपा के कई नेताओं से संपर्क साध रहे हैं, जिनका गठबंधन के चलते टिकट कटा है। इनमें मोहनलालगंज, सीतापुर, बलरामपुर, खीरी, सलेमपुर, राबर्ट्सगंज, आजमगढ़ और हमीरपुर-जालौन जैसी सीटों के क़द्दावर नेता शामिल हैं। इस दौरान में प्रियंका की यादव पिछड़े समुदायों पर भी खास नज़र रहेगी। इसके लिए टीम प्रियंका इन जातियों के संगठनों के नेताओं से बात कर रही है। इन नेताओं की आने वाले दिनों में प्रियंका गांधी से मुलाक़ात करवाई जा सकती है।

फ़िरोजाबाद सीट पर यादव परिवार में हो सकती है टक्कर

उत्तर प्रदेश की तसवीर काफ़ी साफ़ होने लगी है। क्योंकि बीएसपी के 18, सपा के 9 और कांग्रेस के 11 प्रत्याशियों का ऐलान कर चुका है। जहां कांग्रेस ने 11 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी तय किए थे, वहीं शुक्रवार को सपा ने पहले 6 फिर शाम को 3 और प्रत्याशियों के नामों का एलान कर दिया। इन 9 नामों में चार तो मुलायम परिवार के हैं। कन्नौज से डिंपल यादव, बदायूँ से धर्मेंद्र यादव, मैनपुरी से खुद मुलायम सिंह यादव और फिरोजाबाद से अक्ष्य यादव प्रत्याशी बनाए गए हैं। इधर फ़िरोजाबाद में यादव परिवार के दो सदस्य अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव अपनी पार्टी प्रगितशील लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के बैनर से तो चचेरे भाई रामगोपाल के बेटे वर्तमान सांसद अक्षय यादव सपा के टिकट पर आपस में ही टक्कर होगी। जबकि 2009 में यहाँ से राज बब्बर अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव को हराकर सांसद चुने गए थे।

नौजवान पदाधिकारियों को सौंपी जा सकती है कमान

प्रदेश कांग्रेस के एक नेता ने बताया है कि प्रियंका के दो दिनों के प्रवास के दौरान एक दर्जन से ज़्यादा बड़े नेता पार्टी का दामन थामते सकते है। कांग्रेस नेताओं ने बताया है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश की ज्यादातर सीटों पर कांग्रेस को मजबूत प्रत्याशियों के लिए दूसरे दलों का सहारा लेना पड़ रहा है। यूपी के दौरे से वापस जाने के बाद प्रियंका के आने में लगी देर का कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश में संगठन की कमज़ोरी और जिताऊ प्रत्याशियों का न होना है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कांग्रेस संगठन की खस्ता हालत से भी प्रियंका परेशान हैं। लखनऊ में शहर तक में कांग्रेस का संगठन शून्य है, लिहाजा किसी भी कार्यक्रम को आगे ले जाने से पहले कुछ अहम शहरों में तेज़ तरार्र नौजवान पदाधिकारियों को कमान सौंपी जा सकती है। कांग्रेस यूपी में जीतने के लिए जमीनी स्तर से चर्चा करेगी।

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