प्रियंका के चुनाव लड़ने के बयान से बीजेपी के खेमे में हलचल बढ़ी

लोकसभा 2019,

समर्थकों का हुजूम प्रिंयका गाँधी के समर्थन में

ले पंगा ,प्रवीण कुमार। प्रियंका ने कल रायबरेली में ये कह कर सियासी गलियारों में सनसनी फैला दी ,जब पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रियंका से रायबरेली से चुनाव लड़ने की पुरानी मांग दोहराई तो प्रियंका बोल पड़ी की,वाराणसी से चुनाव लड़ूं क्या ? प्रियंका का ये कहना था की पुरे देश की सियासी हवा में हलचल मच गई ,ऐसे में अगर प्रियंका मोदी के खिलाफ मैदान में उतरती है तो यह देश का इस लोकसभा में सबसे दिलचस्प है हाई वोल्टेज चुनाव हो जायेगा ,इस जंग में कौन जीतेगा ,कौन हारेगा फ़िलहाल ये तो समय तय करेगा ,पर प्रियंका के इस तेवर ने बीजेपी की धड़कने जरूर बढ़ा दी हैं, आत्म संतोष के लिए भले ही बीजेपी 2014 की जीत का मार्जिन जोड़ घटा रही हो ,पर तस्वीर धुंधली नजर आने लगी है ,प्रियंका का संकेत इस बार वाराणसी में आर -पार करने का लग रहा है, चाहे अंजाम कुछ भी हो. कल प्रियंका का इतना कहना ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश दोगुना कर गया और वो प्रियंका गांधी जिंदाबाद के नारे जोर-शोर से लगाने लगे.


प्रियंका गांधी जिंदाबाद के नारे जोर-शोर से लगाने लगे

पूरे घटना क्रम सब से गौर करने वाली बात ये है की प्रियंका ने उत्तरप्रदेश में सिर्फ़ वाराणसी का नाम ही लिया,यही बात राजनीतिक दलों के गले में अटक गई हैं ,वाराणसी में विकास हुआ है इसमें कोई शक नहीं, दुनिया सबसे की प्राचीन नगरी काशी में अब आधुनिकता ,की चमक झलकने लगी,पर काशी का महान प्राचीन इतिहास ,जो उसकी पुराणिक मान्यताओं को प्रमाणित करते थे ,वो अब ध्वस्त हो चुके हैं ,विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर पक्के महल सहित तमाम इलाकों को जिमींदोज कर दिया गया ,जिससे काशी वासियों की भावनाएं आहत हुई है ,इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है की इसका असर मोदी के चुनाव पर नहीं पड़ेगा, असर तो जरूर होगा ,कितना होगा ,ये 23 मई की मतगणना के बाद ही तय होगा।

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जिस दिन राहुल गाँधी ने प्रियंका को पूर्वी उत्तरप्रदेश की कमान सौंपी ,उसी दिन से इस बात की संभावना लगने लगी थी की पूर्वांचल में बीजेपी के दोनों दिग्गजों को घेरने के लिए कांग्रेस प्रियंका को कभी भी ऐसी पोजीशन से चुनाव लड़वा सकती है की जहां बीजेपी को मुश्किल में गांधी ने राजनीति में कदम रखा था और पूर्वी यूपी की कमान सौंपी गई थी. इसी के बाद से सियासी कयास लगाए गए थे कि नरेंद्र मोदी को घेरने के लिए कांग्रेस प्रियंका को वाराणसी से उतार सकती है. पीएम मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ के गढ़ कह जाने वाले पूर्वांचल की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी के हाथों में हैं. ऐसे में अगर प्रियंका गांधी वाराणसी सीट से पीएम मोदी के खिलाफ लड़ती हैं तो इसमें कोई हैरानी नहीं होगी, क्योंकि अब तक उन्हें जो भी चुनौतियां मिली हैं उसका उन्होंने सामना किया है. प्रियंका गांधी ने यूपी की राजनीतिक लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है।

वाराणसी में प्रियंका के आने से चुनावी गर्मी बढ़ने लगी है , उन्होंने वाराणसी से चुनाव लड़ने की बात कहकर उसे फिर से बढ़ा दिया है. उनके इस बयान को प्रयाग से मोदी के गढ़ वाराणसी की गंगा यात्रा से भी जोड़कर देखा जाएगा. प्रियंका के इस फैसले से बीजेपी के खेमे में हलचल बढ़ गई है.

हालांकि वाराणसी बीजेपी का गढ़ मानी जाती है लेकिन प्रधानमंत्री की सीट होने के चलते बीजेपी कोई कोर कसर रखना नहीं चाहेगी. पिछले चुनाव में नरेंद्र मोदी ने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अरविंद केजरीवाल को करीब 3 लाख 70 हजार मतों मात दी थी.

वाराणसी में वोटरों का जातीय समीकरण

वाराणसी लोकसभा सीट पर सातवें चरण में वोट डाले जाएंगे. यहां के जातीय समीकरण को देखें तो ब्राह्मण, वैश्य और कुर्मी मतदाता काफी निर्णायक भूमिका में हैं. करीब तीन लाख वैश्य, ढाई लाख कुर्मी, ढाई लाख ब्राह्मण, तीन लाख मुस्लिम, 1 लाख 30 हजार भूमिहार, 1 लाख राजपूत, पौने दो लाख यादव, 80 हजार चौरसिया, एक लाख दलित और एक लाख के करीब अन्य ओबीसी मतदाता हैं.

बीजेपी ने अनुप्रिया पटेल की अपना दल (एस) के साथ गठबंधन करके कुर्मी वोट को एक बार फिर साधने की कवायद की है. जातिगत लिहाज से इस सीट पर सवर्ण वोट बैंक असरदायक माना जाता है. नरेंद्र मोदी के प्रत्याशी हो जाने के बाद 2014 में जिस तरह से तस्वीर बदली, वह किसी से छुपी नहीं है. बीजेपी को वैश्य, बनियों और व्यापारियों की पार्टी माना जाता है.शिव-गंगा के बाद अब राम लला के भरोसे प्रियंका गांधी, जानें अयोध्या दौरे के सियासी मायने प्रियंका गांधी का अयोध्या दौरा और भी अहम हो जाता है. तय कार्यक्रम के तहत प्रियंका रोड शो शुरू करने से पहले हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगी।

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लोकसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग में कुछ दिन बचे हैं. ऐसे में हर राजनीतिक दल अपने-अपने सियासी दांव और चाल चलने में व्यस्त है. कांग्रेस की महासचिव और पूर्वी यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी गंगा यात्रा और शिव पूजा के बाद अब राम लला के शरण में आ गई है . आज अयोध्या पहुंच रही हैं. यहां प्रियंका रोड शो और नुक्कड़ सभा करेंगी. रोड शो से पहले वह हनुमान गढ़ी मंदिर जाकर दर्शन-पूजन कर संतों का आशीर्वाद भी लेंगी. प्रियंका से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी विवादित ढांचा विध्वंस के 26 साल बाद सितंबर 2016 में अपनी अयोध्या यात्रा के दौरान पहली बार हनुमानगढ़ी में दर्शन के लिए पहुंचे थे, जहां उन्होंने संतों का आशीर्वाद भी हासिल किया था. . 2019 के चुनाव के लिए कांग्रेस ने यहां से निर्मल खत्री को उम्मीदवार बनाया है. खत्री ने यहां से 2009 का चुनाव जीता था, लेकिन 2014 में वह बीजेपी से हार गए. 2009 की तुलना में 2014 में उन्हें 15% वोटों का भारी नुकसान झेलना पड़ा था. इसी तरह सुल्तानपुर में संजय सिंह 2009 का चुनाव जीते. लेकिन, 2014 के आम चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा. पार्टी ने 38% वोट खो दिए. अब 2019 के चुनाव में कांग्रेस ने संजय सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाया है.

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