प्रियंका गांधी की कांग्रेस में सक्रियता ने महागठबंधन के लिए सपा-बसपा का किया मजबूर

प्रियंका गांधी की कांग्रेस में सक्रियता ने महागठबंधन के लिए सपा-बसपा का किया मजबूर

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज डेस्क अशोक योगी। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिस दिन से आपस में सीटों की संख्या के बंटवारे का ऐलान किया, उसी दिन साफ हो गया था कि सपा-बसपा कांग्रेस का साथ रायबरेली और अमेठी से आगे देने को तैयार नहीं. सपा-बसपा के इस गठबंधन में राष्ट्रीय लोक दल को भी शामिल किए जाने की संभावना बताई गई थी। आखिर में तीन सीटें देकर उसे साथ लाया गया है। एक सवाल के जबाव में अखिलेश यादव ने कहा था कि कांग्रेस इस गठबंधन का हिस्सा है, इस लिए रायबरेली और अमेठी में वे उम्मीदवार नहीं दे रहे हैं। लेकिन बात यह है कि कांग्रेस खुद को गठबंधन का हिस्सा मानने को तैयार है?  इधर समाजवादी पार्टी ने पिछले शुक्रवार को लोकसभा चुनावों के लिए अपनी पहली सूची जारी करके छह उम्मीदवारों की घोषणा की है। लेकिन इसके एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के लिए कांग्रेस ने अपने 11 उम्मीदवारों की घोषणा की। इस सूची में सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत प्रदेश में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शुमार किए जाने वाले सलमान खुर्शीद, आरपीएन सिंह, जितिन प्रसाद, अनु टंडन और इमरान मसूद जैसे नेताओं के नाम थे।

प्रियंका के आने से बढ़ा कांग्रेस का मनोबल

अब लग रहा है कि उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा-आरएलडी गठबंधन में कांग्रेस के शामिल होने की सारी संभावनाएं खत्म हो गई हैं?  जिस पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के एक प्रमुख नेता ने कहा है कि ‘यह कहना सही नहीं होगा कि गठबंधन की बातचीत नहीं चल रही है, सपा-बसपा और कांग्रेस, दोनों तरफ से कोशिशें चल रही हैं, इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर जो कुछ प्रमुख विपक्षी नेता हैं, उनका भी प्रयास यही है कि कांग्रेस के साथ एक महागठबंधन उत्तर प्रदेश में बने ताकि भाजपा को हराया जा सके। ‘प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश में लगाने से इन्हें भी यह स्पष्ट हो गया है कि अगर इन लोगों ने कांग्रेस को सम्मानजनक सीटें नहीं दीं तो कांग्रेस पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी और इसका खामियाजा सपा-बसपा गठबंधन को भी भुगतना पड़ेगा। इन दोनों दलों के प्रमुख नेताओं को यह लग रहा है कि प्रियंका गांधी को कांग्रेस कोई योजना से लेकर आई है। लेकिन ‘न तो यह बात सपा के लोग मानेंगे और न ही बसपा लोग मानेगें। जबकि प्रियंका गांधी की सक्रियता ने इन दोनों पार्टियों को कांग्रेस के साथ सम्मानजनक समझौता की दिशा में बढ़ने को विवश कर रही है। इधर,प्रियंका गांधी की सक्रियता होने से कांग्रेस का मनोबल बढ़ा हुआ है। जिससे कांग्रेस को लग रहा है कि सपा-बसपा गठबंधन सिर्फ भाजपा का वोट काटेगी। सपा-बसपा के पाले में जाने वाले वोट भी कांग्रेस की ओर आ सकते है। कांग्रेस द्वारा जहां अगड़ी जातियों का वोट काटने से भाजपा का नुकसान होगा तो वहीं मुस्लिम समाज के वोट उम्मीदवारों को देखते हुए कुछ सीटों पर सपा-बसपा के बजाय कांग्रेस के पाले में आ सकते हैं।

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