फारूक अब्दुल्ला की हिरासत को विपक्ष का है विरोध

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ले पंगा न्यूज डेस्क, चंदना पुरोहित। सरकार ने संविधान की अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद कश्मीर में अशांति की आशंका के चलते कश्मीर में शांति बहाली के लिए कुछ कदम उठाए थे। जिसमे कश्मीर के 3 पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती को नजरबंद किया गया था। बाद में फारूक अब्दुल्ला को पीएसए एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया। यह बात पुरे विपक्ष को बहुत नागवार गुजरी। पूरा विपक्ष फारूक अब्दुल्ला को हिरासत में लेने के बाद सरकार पर हमलावर हो गया है।

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम जो खुद अभी आईएनएक्स मिडिया मामले में हिरासत में है उनके ट्विटर अकाउंट से ट्वीट किया गया की ‘में पीएसए के तहत फारूक अब्दुल्ला को हिरासत में लेने की निंदा करता हूँ। कश्मीर में कोई भी ऐसा नहीं है जो अखंड भारत के विचार के लिए समर्पित ना हो। फारूक ने जम्मू और कश्मीर को हमेशा भारत का अभिन्न अंग माना है।’ फारूक अब्दुल्ला 5 अगस्त से नजरबंद हैं। उनके नजरबंदी से नाराज और कश्मीर में लगाई गई पाबंदीयों के खिलाफ तमिलनाडु के वरिष्ठ नेता वायको ने याचिका दायर की।

वहीं पी चिदंबरम के पुत्र व तमिलनाडु से लोकसभा सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी फारुक अब्दुल्ला की हिरासत पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ट्वीट कर सरकार के फैसले को नाजी करार दिया। वही पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी फारूक अब्दुल्ला को हिरासत में लेने पर विरोध जताते हुए दावा किया है की सरकार फारूक अब्दुल्ला जैसे राष्ट्रवादी नेता को हटाकर उनकी जगह आतंकवादियों को लाना चाहती है ताकि वो ध्रुवीकरण के लिए कश्मीर का इस्तेमाल कर सके। इसके साथ ही असद्दुद्दीन ओवेसी और ऐसे कई विपक्षी नेता अब्दुल्ला के हिरासत में लेने के फैसले के विरोध में खुलके सामने आए।

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