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फ्रांस ने की तैयारी, मसूद अजहर की संपत्ति होगी जब्त

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ले पंगा न्यूज डेस्क, प्रीति दादूपंथी। 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर के खिलाफ भारत की मेहनत रंग ला रही है। चीन ने भले ही मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में ग्लोबल आतंकी घोषित होने से बच गया हो। वहीं फ्रांस ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई का समर्थन किया है। फ्रांस की ओर से जारी बयान के अनुसार, ‘वह उसकी सारी संपत्तियां जब्त करेगा। साथ ही आतंकवाद के साथ लड़ाई में वह हमेशा भारत के साथ है।’ वहीं भारत ने इस हमले का जवाब बालाकोट में एयर स्ट्राइक करते हुए जैश के आतंकी कैंपों को तबाह किया था।

चीन में मसूद अजहर को फिर बचाया

पुलवामा हमले के बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में जैश-ए- मोहम्मद के मुखिया को ग्लोबल आतंकी घोषित करने पर जोर दिया। लेकिन चीन ने भारत के प्रयासों को झटका देते हुए मसूद अजहर को बचा लिया। चीन ने वैश्विक आतंकी घोषित करने वाले प्रस्ताव पर तकनीकी रोक लगा दी। 27 फरवरी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘1267 अल कायदा सैंक्शंस कमेटी’ के तहत अजहर को आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका लेकर लाया था।

अमेरिका ने चीन को दी चेतावनी

चीन द्वारा वीटों लगाने से जैए-ए-मोहम्मद के मुखिया को वैश्विक आतंकी घोषित होने से बचाने के कुछ घंटे ही बाद अमेरिका ने चेतावनी दी। यूएनओ में अमेरिकी राजनयिक ने चेतावनी देते हुए कहा कि, ‘इससे दूसरे सदस्यों को ‘अन्य एक्शन लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। अगर बीजिंग आतंकवाद से लड़ने के लिए गंभीर है तो उसे पाकिस्तान और अन्य देशों के आतंकियों का बचाव नहीं करना चाहिए।’ राजनयिक यह भी कहा कि, ‘यह चौथी बार है कि चीन ने ऐसा किया है। चीन को समिति को वह कार्य करने से नहीं रोकना चाहिए, जिसे सुरक्षा परिषद ने करने के लिए सौंपा है। अगर चीन अड़ंगा लगाता रहा तो सुरक्षा परिषद में अन्य सदस्यों को एक्शन लेने पर मजबूर होने पड़ेगा। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।’

आपको बता दें कि 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद के एक फिदायीन ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया था, जिसमें 40 जवानों की मौत हो गई थी। जिसकी वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव उत्पन्न हो गया था। कमेटी के सदस्यों के पास प्रस्ताव पर आपत्ति जताने के लिए 10 कार्य दिन का समय था। यह अवधि बुधवार को (न्यूयॉर्क के) स्थानीय समय दोपहर 3 बजे (भारतीय समयनुसार गुरुवार रात 12:30 बजे) खत्म होनी थी। संयुक्त राष्ट्र में एक राजनयिक ने बताया कि समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले चीन ने प्रस्ताव पर ‘तकनीकी रोक’ लगा दी। राजनयिक ने कहा कि चीन ने प्रस्ताव की पड़ताल करने के लिए और वक्त मांगा है। यह तकनीकी रोक 6 महीनों के लिए वैध है और इसे तीन महीने के लिए आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

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