बजट 2019 : पैन के स्थान पर आधार कार्ड ले सकते है उपयोग, मिली अनुमति

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ले पंगा न्यूज डेस्क, अशोक योगी। केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार के बजट में आम करदाता को कोई नई राहत नहीं दी है। हालांकि कर भुगतान को आसान बनाने के कई उपाय किए गए हैं, जिसमें पैन के स्थान पर आधार के प्रयोग की अनुमति देना शामिल है।

निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में 2019-20 का केन्द्रीय बजट पेश करते हुए कहा कि कंपनी कर की 25 प्रतिशत न्यूनतम दर को 400 करोड़ रुपये तक वार्षिक कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए लागू किया जाएगा। फिलहाल 250 करोड़ रुपये तक वार्षिक कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए यह दर लागू है। उन्होंने बताया कि इसमें 99.3 प्रतिशत कंपनियां शामिल होंगी। अब केवल 0.7 प्रतिशत कंपनियां ही इस दर से ज्यादा दर से कर देंगी।

यदि किसी बैंक खाते से एक वर्ष में एक करोड़ रुपये से अधिक धनराशि की नकद निकासी की जाएगी तो 2 प्रतिशत के स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) की जाएगी। डिजिटल भुगतान और कम नकद अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने तथा डिजिटल भुगतान पर जोर देने के लिए हाल में उठाए गए अनेक कदमों से आगे बढ़ते हुए यह प्रस्ताव किया गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि आय कर दाताओं को पहले से भरी गई कर विवरणी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें वेतन से आय, प्रतिभूतियों से पूंजीगत प्राप्तियां, बैंक से मिले ब्याज और लाभांश तथा कर में कटौतियों का विवरण शामिल होगा। उन्होंने कहा कि बैंकों, स्टॉक एक्सचेंजों, म्युचुअल फंडों, ईपीएफओ, राज्य पंजीकरण विभागों आदि जैसे संबंधित स्रोतों से ऐसे आय के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे न केवल आयकर विवरणी भरने में लगने वाले समय में कमी आएगी, बल्कि आय और करों की प्रस्तुति में सटीकता भी सुनिश्चित होगी।

रेलवे में विकास के लिए पीपीपी मॉडल को होगा अपनाना : सीतारमण

केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए आम बजट पेश करते हुए कहा कि भारतीय रेलवे तेजी से विकास और यात्री माल ढुलाई सेवाओं के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल को अपनाएगा। केंद्रीय वित्तमंत्री ने कहा कि यह अनुमान है कि रेलवे को स्वीकृत परियोजनाओं को पूरा कर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 2018 से 2030 की अवधि के लिए 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी। यह देखते हुए कि रेलवे का पूंजीगत व्यय प्रति वर्ष लगभग 1.5 से 1.6 लाख करोड़ रुपये है, सभी स्वीकृत परियोजनाओं को पूरा करने में दशकों लगेंगे।

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