बागियों की बिहार सियायत में होगी अहम् भुमिका, कई जगह होगें त्रिकोणीय मुकाबले

बागियों की बिहार सियायत में होगी अहम् भुमिका, कई जगह होगें त्रिकोणीय मुकाबले

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज डेस्क,अशोक योगी। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव होते जा रहे है वैसे-वैसे मुकाबला रोचक होता जा रहा है। बिहार के लोकसभा चुनाव में एनडीए बनाम महागठबंधन के बीच दिलचस्प मुकाबला होने वाला है। क्योंकि बिहार के लोकसभा सीटों की जंग में तमाम दलों ने किसी न किसी खेमों का हाथ थाम लिया है। लेकिन इसके बावजुद भी करीब एक दर्जन सीटें ऐसी हैं जहां मुकाबले का तीसरा कोण होने वाला है। जिनमें से कुछ जगहों पर टिकट कटने से बागी हुए उम्मीदवार तो कुछ जगहों पर पप्पू यादव जैसे अपनी अलग पार्टियां खड़ी करने वाले नेता मजबूती से मैदान में खड़े हैं और दोनों में से किसी न किसी गठबंधन का गेम बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं।

कई सांसदों के कटे टिकट

बीजेपी ने जेडीयू को सहयोग करने के चक्कर में अपने 5 सीटिंग सांसदों के टिकट देने से मुहं फेर लिया। इनमें सीवान से ओमप्रकाश यादव, वाल्मीकि नगर से सतीश चंद्र दूबे, गया से हरि मांझी, झंझारपुर से बीरेन्द्र कुमार चौधरी और गोपालगंज से जनक राम के नाम शामिल हैं। महागठबंधनों का समीकरण ऐसा बना कि बीजेपी, आरजेडी समेत तमाम दलों को पिछली बार से कम सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ रहा है। वहीं आरजेडी में अली अशरफ फातमी, कांति सिंह, सीताराम यादव और आलोक मेहता तो कांग्रेस में शकील अहमद, लवली आनंद और निखिल कुमार जैसे नेताओं के टिकट काट दिया है। कई सीटों पर बागी उम्मीदवार या तो मैदान में उतर गए हैं इन सीटों पर मुकाबला रोचक हो गया है। वही दक्षिण बिहार की बांका सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की पत्नी पुतुल देवी टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गई हैं। यहां से एनडीए ने जेडीयू नेता गिरधारी यादव को उतारा है। मुकाबला आरजेडी के जय प्रकाश यादव से है। महागठबंधन ने मधुबनी से टिकट वीआईपी पार्टी को दिया तो सहयोगी दलों कांग्रेस और आरजेडी में ही बगावत हो गई। पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहम्मद अली अशरफ फातमी ने आरजेडी तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने अपनी पार्टी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। वीआईपी ने बद्री पुर्बे को मधुबनी से अपना उम्मीदवार बनाया है। बीजेपी ने इस सीट से दिग्गज सांसद हुकुमदेव नारायण यादव के बेटे अशोक यादव को उतारा है। अगर ये दोनों नेता चुनाव मैदान में उतरते हैं तो महागठबंधन सहयोगी वीआईपी पार्टी के उम्मीदवार के लिए राह आसान नहीं होगी।

पप्पू यादव को नही मिला कांग्रेस का टिकट

इस बार बिहार की सबसे कठिन त्रिकोणीय लड़ाई मधेपुरा सीट पर होने जा रहा है क्योंकि बाहुबली पप्पू यादव यहां से वर्तमान सांसद है। जो कांग्रेस से टिकट चाहते थे लेकिन बात बनी नहीं और वे अपनी पार्टी जनअधिकार पार्टी के टिकट पर मैदान में उतर गए। आरजेडी ने यहां से दिग्गज नेता शरद यादव को उतारा है तो एनडीए की ओर से जेडीयू के दुलारचंद यादव उम्मीदवार हैं। उधर उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा महागठबंधन का हिस्सा है और 5 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। लेकिन पार्टी के खिलाफ उनके ही वर्तमान सांसद राम कुमार शर्मा ने मोर्चा खोल दिया है। सीतामढ़ी से सांसद राम कुमार शर्मा ने रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा पर टिकट बेचने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुशवाहा को हराने के लिए वे प्रचार करेंगे और काराकाट और उजियारपुर में उपेंद्र कुशवाहा की हार सुनिश्चित करेंगे। राजपूत बहुल महाराजगंज सीट पर बीजेपी ने सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल को दोबारा मौका दिया तो पार्टी के एमएलसी सच्चिदानंद राय निर्दलीय मैदान में उतर पड़े। सच्चिदानंद राय इस सीट से टिकट के दावेदार माने जा रहे थे लेकिन पार्टी ने सिग्रीवाल को ही दोबारा मौका दिया। यहां से लालू यादव के साले साधू यादव बसपा के टिकट पर उतरे हैं तो जीतनराम मांझी की हम पार्टी के बागी महाचंद्र प्रसाद सिंह निर्दलीय चुनाव लड रहे है।

शत्रुघ्न सिन्हा का मुकाबला पुराने साथ रविशंकर से

वही कायस्थ वोटों के गढ़ पटना साहिब में बीजेपी के बागी शत्रुघ्न सिन्हा अब कांग्रेस उम्मीदवार हैं। उनके सामने बीजेपी ने रविशंकर प्रसाद को टिकट दिया है। लेकिन आर के सिन्हा के समर्थकों की नाराजगी रविशंकर प्रसाद को भारी पड़ सकती है। ये तल्खी यहां जमीन पर भी दिख रही है। इधर, बाहुबली नेता आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद पिछले दिनों कांग्रेस में आईं थीं टिकट की उम्मीद में लेकिन ये सीट आरजेडी के खाते में चली गई। हालांकि शिवहर सीट से आरजेडी भी अभी उम्मीदवार तय नहीं कर पा रही। इसी सीट को लेकर लालू के दो बेटों तेजस्वी और तेजप्रताप में ठनी हुई है. टिकट नहीं मिलने के बाद लवली आनंद यहां से निर्दलीय उतरने का ऐलान कर चुकी हैं. शिवहर से उनके पति आनंद मोहन दो बार सांसद रह चुके हैं। जबकि लवली आनंद खुद 1994 में वैशाली से चुनकर लोकसभा जा चुकी हैं। वही सीतामढ़ी के पूर्व सांसद सीताराम यादव के बागी होने की बात महागठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवार अर्जुन राय को परेशान कर रही है. सीताराम यादव उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने मुखिया से लेकर संसद तक का सफर किया है. जमीन पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। वे प्रखंड प्रमुख, विधायक और मंत्री भी रहे हैं. उनका असंतोष आरजेडी के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

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