बिहार महागठबंधन: आरजेडी 18 व कांग्रेस 10 पर बनी सहमति !

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज़ डेस्क, तीर्थराज । जल्द ही देश में होने वाले लोकसभा चुनाव के समर में कूदने को राजनीतिक पार्टियां कमर कसने में लग चुकी है। साथ ही साथ कौन कहां और किस समीकरणों के साथ चुनावी मैदान में उतरने वाला है, ये तस्वीर भी अब धीरे-धीरे साफ होती जा रही है। बिहार प्रदेश की राजनीति में उभरे महागठबंधन की बैठक के बाद इसमें शामिल पार्टियों के सीट बंटवारे पर सहमति बनने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार कुल 40 लोकसभा सीटों में से 18 सीटों पर लालू प्रसाद की राष्ट्रीय जनता दल पार्टी अपने उम्मीदवार उतारेंगी तो वहीं 10 सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव लड़ने वाले है। उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, जीतनराम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा और मुकेश निषादी की पार्टी के बीच इसके बाद बची सीटों में बंटवारा होना तय है। हांलाकि एनडीए छोड़कर महागठबंधन में शामिल हुए उपेन्द्र कुशवाहा द्वारा सीटों के बंटवारे का ऐलान खंडमास के बाद में करने की बात कही गई है।


बिहार महागठबंधन में आरजेडी बड़े भाई की भूमिका में
दिल्ली में बुधवार को बिहार महागठबंधन की हुई बैठक में मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी शामिल हुए और आगामी लोकसभा चुनाव में अपनी-अपनी पार्टी की सीट के बंटवारे के बारे में विचार-विमर्श कर सहमति बनाई गई। हांलाकि सीटों के बंटवारे का ऐलान खड़मास के बाद करने की बात कही गई है। वहीं आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता भाई वीरेंद्र ने महागठबंधन के सीट बंटवारे को लेकर कहा गया था कि राष्ट्रीय जनता दल बिहार में बड़े भाई की भूमिका में हैं और अगर आरजेडी नहीं तो कुछ नहीं, खत्म हो जाएगा। इसके अलावा भाई विरेन्द्र ने उपेन्द्र कुशवाहा के भी महागठबंधन में शामिल होने की बात करते हुए कहा कि हमारा जनप्रभाव ज्यादा है इसलिए दावेदारी भी ज्यादा होगी। बता दें कि, एनडीए में मनचाही सीटें नहीं मिलने के चलते महागठबंधन में शामिल उपेन्द्र कुशवाहा को 4-5 सीटें मिलने की बात सामने आ रही है।
एनडीए छोड़ उपेन्द्र कुशवाह बने महागठबंधन का हिस्सा
एनडीए से हाथ खींच चुके उपेन्द्र कुशवाहा को महागठबंधन में तरजीह दी गई है। सूत्रों के अनुसार एनडीए में उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को मनचाही सीटें नहीं दिये जाने को लेकर नाराजगी सामने आई थी। जिसके बाद उपेन्द्र ने एनडीए से किनारा कर महागठबंधन में शामिल होने का निर्णय ले लिया। उपेन्द्र कुशवाहा के महागठबंधन में शामिल होने को लेकर तेजस्वी यादव कह चुके हैं कि उन्हें पहले भी साथ होने होने के लिए कहा गया था, वे देश का भला चाहते हैं इसलिए हमारे साथ हैं। महागठबंधन में क्षेत्रीय दलों को शामिल करने की कोशिश की गई है। वहीं तेजस्वी ने एलजेपी के भी महागठबंधन में जल्द शामिल होने के संकेत देते हुए कहा कि एलजेपी भी एनडीए में पीएम मोदी से खुश नहीं है।
बिहार महागठबंधन का डर पीएम मोदी को भी
बिहार का महागठबंधन राजनीतिक गलियारों में तो चर्चा बना ही हुआ है, साथ ही पीएम मोदी सहित की बीजेपी की आंखों में किरकिरी बन खटकने भी लगा है। यही कारण है कि पीएम नरेंद्र मोदी को जब भी मौका मिलता है महागठबंधन पर निशाने से नहीं चूकते हैं। मोदी ने हाल ही में एक रैली में ‘महागबंधन’ को ‘अमीर वंशों’ का एक समूह बताया था और कहा था कि विपक्षी दलों की कोशिशें उनकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और अस्तित्व की रक्षा से प्रेरित हैं। पीएम मोदी तो यहां तक कह चुके हैं कि, जिस कांग्रेस ने विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुख नेताओं का अपमान किया और उन्हें धोखा दिया, वही दल अब महागठबंधन की बात कर रहे हैं। सपा को घेरते हुए पीएम मोदी राममनोहर लोहिया का उदाहरण दे चुके हैं।
चेन्नई के बीजेपी कार्यकर्ताओं से वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए संवाद के दौरान भी मोदी ने कहा, ‘विभिन्न राजनीतिक दल आज महागठबंधन की बात कर रहे हैं। मैं आपको बता दूं कि गठबंधन व्यक्तिगत अस्तित्व की रक्षा के लिए है, न कि विचारधाराओं का समर्थन है। यह गठबंधन सत्ता के लिए है, न कि जनता के लिए। यह गठबंधन लोगों की आकांक्षाओं के लिए नहीं, बल्कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के लिए है।’ अब पीएम के देश के दूसरे छोर पर जाकर भी महागठबंधन को नहीं भूलने से तो यही लगता है कि कहीं न कहीं पीएम मोदी को बिहार का महागठबंधन डरा जरूर रहा है। क्योंकि बिहार की 40 सीट सत्ता की सीढ़ी के लिए काफी अहम है।

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