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बीजेपी के हाथ से गोवा की सत्ता छीन सकती है कांग्रेस…जाने क्या है सियासी समीकरण

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज डेस्क, प्रीति दादूपंथी। कैंसर से जूझ रहे गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का निधव रविवार को हो गया है। मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद राज्य में नए मुख्यमंत्री की तलाश शुरू हो गई है। क्षेत्रीय दलों के साथ यहां गठबंधन सरकार चली रही बीजेपी अपनी पार्टी से ही किसी नेता को नए सीएम दावेदार के रूप में पेश करना चाहती है, मगर एक प्रमुख सहयोगी दल के विधायक ने खुद की दावेदारी ठोककर बीजेपी को मुश्किल में डाल दिया है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने पर्रिकर के निधन के बाद सरकार बनाने के लिए फिर से दावा पेश किया है। कांग्रेस ने पूर्व में पर्रिकर की तबीयत ज्यादा खराब होने पर शनिवार को राज्यपाल के सामने दावा पेश किया था लेकिन कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने न तो उनके पत्र का जवाब दिया और न ही उन्होंने मिलने का समय दिया। जानकार सूत्रों के अनुसार देर रात गोवा पहुंचे केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी राज्य में भगवा पार्टी और गठबंधन सहयोगी दलों के बीच कोई आम सहमति नहीं बना सके।

राजनीतिक सियासी समीकरण को जाने

गोवा में सरकार बनाने के लिए 19 विधायकों की आवश्यकता है। यदि बीजेपी एमजीपी के विधायक सुदीन धवलीकर को मनाने में नाकाम रहती है और वह कांग्रेस के खेमे में चले जाते है, तो भाजपा नीत गठबंधन के विधायकों की संख्या 17 रह जाएगी। वहीं कांग्रेस के विधायकों की संख्या भी 17 हो जाएगी। दोनों पार्टियों बहुमत से दो-दो विधायकों से दूर रहेंगी। ऐसे में कांग्रेस एक एनसीपी और एक निर्दलीय विधायक को अपने पक्ष में करके सरकार बना सकती है।

सरकार बनाने का दूसरी बार दावा पेश करने वाली कांग्रेस के अनुसार उसके पास बहुमत है। ऐसे में कांग्रेस गोवा फॉरवर्ड पार्टी के विधायकों को भी अपने पाले में करके सरकार बनाने की कोशिश कर सकती है।

इससे पूर्व गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) प्रमुख विजय सरदेसाई ने कहा था कि पार्टियां अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। सरदेसाई ने कहा कि बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला और भाजपा ने उन्हें सूचित किया है कि बाद में दिन में फिर से बैठक होगी। सरदेसाई अपने विधायक जयेश सालगांवकर और विनोद पालेकर तथा निर्दलीय विधायक रोहन खोंटे, गोविंद गावडे और प्रसाद गांवकर के साथ पहुंचे।

40 विधानसभा सीटों वाले राज्य में भाजपा के पास 12 विधायक है। वहीं भाजपा को गोवा फॉरवर्ड पार्टी और एमजीपी के तीन-तीन और एक एनसीपी विधायक का समर्थन हासिल है। इसके अलावा एक निर्दलीय उम्मीदवार भी भाजपा के समर्थन में है। इसके अनुसार भाजपा के साथ 21 विधायक है। वहीं कांग्रेस के पास 14 विधायक है।

गोवा भाजपा विधायक माइकल लोबो ने कहा कि महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी (एमजीपी) के विधायक सुदीन धवलीकर मुख्यमंत्री बनना चाहते है जिससे बातचीत में गतिरोध पैदा हो गया है। लोबो ने रातभर चली बैठक के बाद कहा, ‘सुदीन धवलीकर खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं जबकि भाजपा चाहती है कि गठबंधन का नेता उसके खेमे का होना चाहिए। हम किसी भी फैसले पर नहीं पहुंच पाए।’

भाजपा को सहयोगी दलों से बातचीत करने गोवा पहुंचे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को बीजेपी विधायकों ने मुख्यमंत्री पद के लिए विश्वजीत राणे और प्रमोद सावंत के नाम सुझाए है।

बीजेपी ने रविवार को अपने दो पर्यवेक्षक गोवा रवाना किए थे और अपने विधायकों को राज्य में बने रहने के लिए कहा। यह निर्देश कांग्रेस का सरकार बनाने का दावा पेश करने और पर्रिकर की तबीयत ज्यादा खराब होने के बाद दिए गए थे।

2017 साल में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान गोवा में कांग्रेस को सबसे ज्यादा सीटें मिली थी। हालांकि बीजेपी ने अन्य दलों को अपने पाले में लाकर सरकार बनाने में बाजी मार ली।

कर्नाटक में भाजपा के ‘कमल ऑपरेशन 2008’ के तहत चली चाल को अपनाकर कांग्रेस भाजपा से सत्ता छीन सकती है। कर्नाटक में भाजपा ने कांग्रेस के बागी विधायकों से इस्तीफा दिला दिया था। इसके बाद बहुमत का आंकड़ा नीचे चला गया था। ऐसे में कांग्रेस भाजपा के किसी असंतुष्ट या फिर अन्य पार्टी के विधायक से इस्तीफा दिलवा सकती है। इससे सदन में बहुमत साबित करने का आंकड़ा नीचे चला जाएगा।

इस साल के शुरुआत में बीजेपी विधायक फ्रांसिस डिसूजा और रविवार को पर्रिकर के निधन तथा पिछले साल कांग्रेस के दो विधायकों सुभाष शिरोडकर और दयानंद सोपटे के इस्तीफे के कारण सदन में विधायकों की संख्या 36 रह गयी है।

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