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भारत के सख्त रुख से पाक में घबराहट

एयर स्ट्राइक,

पुलवामा हमले के बाद भारत के सख्त रुख से पाकिस्तान सकते में है ,पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शांति की बहाली के लिए एक मौका मांगा है .पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के कार्यालय से जारी बयान के अनुसार , ‘प्रधानमंत्री इमरान खान अपनी इस बात पर कायम हैं कि अगर भारत कार्रवाई करने योग्य सुबूत देगा तो वह तत्काल कार्रवाई करेंगे।’ इमरान खान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को शांति को एक और मौका देना चाहिए।गौरतलब है कि इमरान खान का यह बयान विगत शनिवार को राजस्थान के टोंक में दिए प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘आतंकवाद के खिलाफ विश्व में एक राय बन चुकी है। आतंकवाद के पैरोकारों को पूरी ताकत से दंड दिया जाएगा। इस बार हिसाब होगा। यह हिसाब अच्छे के लिए होगा। यह नया भारत है, अब दर्द बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आतंकवाद को कुचलना हमें आता है।’ तब भारतीय पीएम ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान में नए प्रधानमंत्री को प्रोटोकॉल के तहत मैंने बधाई दी थी और कहा था कि बहुत लड़ लिए हिंदुस्तान-पाकिस्तान, लेकिन पाकिस्तान को कुछ नहीं मिला। इस पर इमरान ने कहा था कि मैं पठान का बच्चा हूं। मैं सच्चा बोलता हूं और सच्चा करता हूं। इस पर विगत दिवस मोदी ने प्रतिक्रिया दी कि आज इमरान के ये शब्द कसौटी पर हैं।

पाकिस्तान के तीन पूर्व विदेश सचिवों ने पुलवामा हमले पर प्रधानमंत्री इमरान खान को आगाह किया है। तीनों ने इमरान सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह पुलवामा हमले को मुंबई हमला समझने की भूल ना करे। संकट को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने का सुझाव दिया है। साथ ही भारत की तरफ से आक्रामक कार्रवाई के लिए भी तैयार रहने को कहा है।

पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि इसका बदला लेने के लिए सुरक्षा बलों को पूरी छूट दे दी गई है। हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे।

पूर्व विदेश सचिवों रियाज हुसैन खोकर, रियाज मोहम्मद खान और इनामुल हक ने रविवार को दैनिक समाचारपत्र डॉन में एक संयुक्त लेख लिखा है। इसमें तीनों ने दोनों देशों की मीडिया, राजनीतिक नेतृत्व, खुफिया संस्थाओं और लोगों की राय बनाने वालों से अपील की है कि वह तनावपूर्ण माहौल में कुछ संतुलन बनाने और संयम बरतने की जिम्मेदारी दिखाएं।

पूर्व विदेश सचिवों ने कहा है कि ‘पुलवामा मुंबई नहीं है’ क्योंकि एक स्थानीय किस्म की कार्रवाई स्पष्ट नजर आ रही है। मुंबई हमले के दौरान भारत ने संयम बरता था, उसके विपरीत पुलवामा हमले के बाद भारत ने युद्ध का नगाड़ा बजा दिया है।

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