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मदरसों पर रद्दीकरण की लटकी तलवार, जयपुर में तीन का पंजीयन रद्द

राजनीति,

जयपुर । राजस्थान की पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार के अल्पसंख्यक मामलात विभाग को कम छात्र संख्या के 902 मदरसों की सूची मदरसा बोर्ड द्वारा सौंपी गई, जिस पर वसुंधरा सरकार ने एक्शन लेते हुए 655 मदरसों के पंजीकरण रद्द कर दिये थे। हाल ही प्रदेश में नई सरकार आई तो मदरसों की स्थिति सुधारने के साथ हाईटेक करने की बात कही गई थी लेकिन प्रदेश की गहलोत सरकार ने राजधानी जयपुर के तीन मदरसों का पंजीयन रद्द कर मदरसा बोर्ड द्वारा उन्हें दिया गया सामान भी जब्त करने के आदेश दिये हैं। जिसके बाद पूर्ववर्ती सरकार द्वारा सूचीबद्ध किये गये अन्य मदरसों पर भी पंजीयन रद्दीकरण की तलवार लटक रही है।

आस थी मदरसों के विकास की, हो रहे पंजीकरण रद्द

पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार द्वारा कम छात्र संख्या को देखते हुए 902 मदरसों का चयन कर उनमें से 655 मदरसों की मान्यता को रद्द किया गया था, जिसके बाद प्रदेश में जीत कर आई गहलोत सरकार द्वारा मदरसों के विकास करने की बात कही गई थी। लेकिन सरकार ने मदरसों को लेकर पहला कदम ही तीन मदरसों के पंजीयन रद्द करने का उठाया है। साथ ही साथ इन तीनों मदरसों को मदरसा बोर्ड की ओर से उपलब्ध करवाया गया सामान भी जब्त करने का आदेश तक दे डाला है। जिसमें राजधानी जयपुर के भट्टा बस्ती के सफिया मदरसा, घाटगेट के मोहम्मदी गुलजार मदरसा और सूफी मोहल्ला का बिलोचान मदरसा का गहलोत सरकार ने पंजीयन रद्द कर दिया है।

पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार ने लिया था बड़ा एक्शन

राजस्थान की पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार के कार्यकाल के दौरान साल 2015 में प्रदेश में कुल 3800 मदरसों का पंजीयन था। जिस पर सरकार के आदेश के बाद मदरसा बोर्ड की ओर से प्रदेश में एक डाटा कैप्चर रिपोर्ट तैयार करवाई गई थी। कम छात्र संख्या को लेकर मदरसा बोर्ड की ओर से दी गई सूची के अनुसार 902 मदरसों को चिन्हित कर वसुंधरा सरकार ने बड़ा एक्शन लेते हुए 655 मदरसों का पंजीयन रद्द कर दिया गया। गौरतलब है कि मदरसा बोर्ड को 2015 में 148 मदरसें भौतिक सत्यापन के दौरान मिले ही नहीं थे, साथ ही प्रदेश के 507 मदरसे कभी शुरू ही नहीं हुए थे। वहीं इसके अलावा करीब 228 मदरसे ऐसे थे, जहां छात्रों की संख्या 20 से भी कम थी, जिन्हें दूसरे मदरसों में मर्ज कर दिया गया।

हाईटेक सुविधा देने की बजाय पंजीयन ही रद्द

बता दें कि साल 2003 में मदरसा बोर्ड की ओर से मदरसों को सरकारी सुविधाओं के साथ अनुदान देने के लिए मदरसों की पंजीयन प्रक्रिया शुरू की थी ताकि साथ ही मदरसों के जरिए अल्पसंख्यत तबके में शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सके। जबकि सरकार की ओर से की जा रही कार्रवाई इसके सब के उलट ही हकीकत बयां कर रही है, जिसमें एक तरफ राज्य सरकार द्वारा मदरसा तालिम को हाईटेक करने की बात की जा रही हो और दूसरी ओर नई सरकार द्वारा मदरसा बोर्ड अध्यक्ष नियुक्त किये बिना ही तीन मदरसों की मान्यता ही रद्द करने जैसा कदम उठाया जाता है।

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