…मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो आप भी बड़ी से बड़ी जंग जीत सकते हैं, जानिए ऐसी ही एक सच्ची घटना के बारें

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ले पंगा न्यूज डेस्क, प्रियंका शर्मा। सफलता किसी चीज़ की मोहताज़ नहीं होती, यह लाइन्स कई बार बहुत से लोगों की जुबानी सुनी जरूर है, पर ऐसा कुछ होता है यह तो हम लोगो ने किस्सों कहानियों में बचपन में दादी-नानी के द्वारा सुना करते थे, बड़े बुज़ुर्ग कहते है कि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो इंसान बड़ी से बड़ी जंग भी अपनी सच्ची मेहनत और लगन से जीत ही लेता है, जी हाँ एक ऐसा ही दिलचस्प वाक्या इंदौर के एक परिवार के साथ हुआ, ये वहीं इंदौर है जो सफाईकर्मियों की बदौलत साफ़-सफाई, स्वछता की लहर में देश में पहले नंबर पर आया है। वहीं, अब एक महिला सफाईकर्मी नूतन घावरी की बेटी रोहिणी को प्रदेश सरकार के अनुसूचित जनजाति विभाग ने एक करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप दी है।

दरअसल मार्केटिंग में एमबीए कर चुकी रोहिणी अब पीएचडी के लिए स्कॉटलैंड जाएंगी। रोहिणी की मां नूतन कर्मचारी राज्य बीमा निगम अस्पताल में सफाईकर्मी हैं। रोहिणी की माँ यानि की नूतन बताती हैं कि, “मैं दस साल तक रोहिणी को अपने साथ ही ड्यूटी यानी अपनी काम की जगह पर खुद के साथ ले जाती थी, लेकिन उसका मन तो पढ़ाई-लिखाई में ही लगता था। हमारी बेटी शुरुआत से ही पढ़ने में होनहार रही है. रोहिणी ने जब और आगे पढ़ने की इच्छा जताई तो, हम भी मना नहीं कर पाए और मेरे पास जो अपना थोड़ा बहुत सोना था, उसे गिरवी रखकर उसे आगे पढ़ाया।

बता दे कि रोहिणी की माँ का सोना आज भी गिरवी रखा हुआ है।” वहीं, रोहिणी ने बताया कि मैं जब भी परिवार के साथ किसी शादी समारोह में जाती थी, तो लोग पापा को ताने मारते हुए कहते थे कि बेटी बड़ी हो गई है। हाथ पीले कर दो,नहीं तो अच्छा लड़का नही मिलेगा। अब वही लोग पापा को बधाई देते हैं और अपने बच्चों को मेरा उदाहरण—- तो आप देख सकते है जो लोग बेटियों को, बेटों से कम आंकते है उन्हें लड़को की तरह बोलने, लिखने पढ़ने की आजादी नहीं देते है। जिन्हें हर बार यह कहकर चुप करा दिया जाता है कि, धीरे बोलो तुम एक लड़की हो, ऐसा पहनो चूंकि तुम एक लड़की हो, शाम के बाद घर से ना निकलो क्यूकि तुम एक लड़की हो, आप तो लड़के की शिक्षा पर ध्यान दीजिये..बेटियों को तो वैसे भी पराये घर जाना है, तो इतना पढ़ा-लिखाकर क्या फायदा, लड़कियां घर पर रहकर सिर्फ घर संभालती है, नौकरी से इनका क्या सरोकार। ऐसी तमाम तरह की बातें, उन दूषित मानसिकता वाले लोगों के मुँह से कई बार कहते सुना होगा ना, लेकिन अब दौर बदल रहा है, धीरे-धीरे माँ बाप अपनी बेटियों को उनके सपनों को पूरा करने के लिए उन्हें अपनी मेहनत और पसीने रूपी पंख दे दिए है, जिससे वो अपनी मंजिल तक पहुंचकर कर लक्ष्य भेद कर पाएं.. सलाम है ऐसे माता-पिता को जो अपने सपनों, शौक आदि को मारकर अपनी संतानो के लिए मरते-मिटते है….

गौरतलब है कि रोहिणी के तीन भाई बहिन और है जो रोहिणी की तरह ही होनहार है, रोहिणी की खेल-कूद में काफी रूचि है, और रोहिणी के साथ-साथ ही उसके बाकी भाई-बहनों की भी खेल में रुचि है; बता दे कि राेहिणी वालीबाॅल की राष्ट्रीय खिलाड़ी भी हैं। उसकी दो बहनें- कोमल, अश्विनी और एक भाई हर्ष है। कोमल नीट क्वालिफाई हैं। अश्विनी 12वीं में है और वह भी स्टेट लेवल की वॉलीबॉल खिलाड़ी हैं। भाई हर्ष नेशलन अंडर 14 बास्केटबाॅल टीम का कप्तान है। तो धन्य है ऐसे माता-पिता जिन्होंने ऐसी काबिल संतान को जन्म दिया, जो इतनी कम सुख-सुविधाओं के रहते अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देने की पूरी कोशिश कर रहे है आज सम्पन्न परिवार के लोग जो सारे ऐशो आराम के बाद अपने बच्चों को ऐसा पॉजिटिव माहौल नहीं दे पाते है, वो एक निम्न परिवार ने दिया और समाज में एक अच्छा उदहारण पेश किया।।।

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